Operation Sindoor: शहीदों की शहादत पर घमासान! रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों का दिया करारा जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद पर रक्षा मंत्रालय और सेना ने सख्त रुख अपनाया है। कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जवानों की शहादत को घटना के समय ही सर्वोच्च सम्मान दिया गया था। जानें क्या है पूरा विवाद और शहीदों के सम्मान से जुड़े वास्तविक तथ्य।

ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्रालय की तीखी सफाई

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 28, 2026

Operation Sindoor: हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों को लेकर शुरू हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा केंद्र सरकार पर यह गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद कि सरकार ने छह जवानों की शहादत को एक साल तक छिपाकर रखा और उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया, रक्षा मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह से निराधार और गुमराह करने वाला बताया। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश ने इन वीरों को घटना के तुरंत बाद ही सर्वोच्च सम्मान दिया था और उनके बलिदान को हमेशा अत्यंत श्रद्धा और गर्व के साथ याद किया जाता है।

शहीदों को बहुत पहले ही दिया जा चुका है उचित सम्मान

बताते चले कि, रक्षा मंत्रालय ने अपनी सफाई में उन तथ्यों को सार्वजनिक किया जिनसे साबित होता है कि जवानों की शहादत को कभी नहीं छिपाया गया। मंत्रालय के अनुसार, 11 मई 2025 को सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन बहादुर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी थी। इसके अलावा, 14 अगस्त 2025 की प्रेस विज्ञप्ति में भी उनके वीरता पुरस्कारों का उल्लेख किया गया था। इस साल 15 जनवरी को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान सेना प्रमुख द्वारा शहीद जवानों के परिवारों को सेना मेडल प्रदान किए गए थे, और 8 अक्टूबर को वायुसेना प्रमुख ने भी उन्हें सम्मानित किया था।

नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीदों की गौरवगाथा

विवाद को पूरी तरह से खारिज करते हुए रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन छह शहीदों—सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार—के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की गौरवमयी दीवार पर अंकित किए जा चुके हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि शहीदों के नाम मेमोरियल पर अंकित करने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है, जिसका पालन पूरी गरिमा के साथ किया जाता है। गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए 22 अप्रैल 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था, जिसमें ये जवान शहीद हुए थे।

गुमराह करने वाली सूचनाओं का खंडन

रक्षा मंत्रालय के बाद भारतीय सेना ने भी मोर्चा संभालते हुए सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों का कड़ा खंडन किया है। सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कुछ लोग जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं, जो कि बेहद अफसोसजनक है। सेना ने स्पष्ट किया कि यह पहला मौका नहीं है जब इन नायकों की शहादत को मान्यता दी गई है, बल्कि उनकी कुर्बानी को पहले दिन से ही सैन्य सम्मान के साथ स्वीकार किया गया है। सेना और मंत्रालय ने देशवासियों से ऐसी गलत सूचनाओं पर विश्वास न करने की अपील की है, क्योंकि यह शहीदों के सर्वोच्च बलिदान का अपमान करने जैसा है।