Operation Sindoor: ईरान ने पाकिस्तान का साथ दिया था? तेहरान को लेकर दावे की पूरी सच्चाई

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की तरफ से बड़ा दावा सामने आया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के मुताबिक, मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ईरान ने पाकिस्तान का कूटनीतिक और रणनीतिक समर्थन किया था। लेकिन ईरान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Operation Sindoor

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 25, 2026

Operation Sindoor: पाकिस्तान ने मई 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान से मजबूत समर्थन मिलने का दावा किया है। यह दावा पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने नेशनल असेंबली में पाकिस्तान-ईरान संबंधों से जुड़े सवाल के लिखित जवाब में किया। डार के बयान के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान की किस तरह मदद की थी और क्या वास्तव में तेहरान ने इस्लामाबाद का खुलकर साथ दिया था?

इशाक डार ने संसद में क्या कहा?

इशाक डार के मुताबिक पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान और ईरान के संबंधों में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि जून 2025 में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने तेहरान को राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दिया था। इसके बदले डार का दावा है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के दौरान ईरान ने भी पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया।

डार ने यह भी बताया कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष के करीब दो सप्ताह बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान का दौरा किया था। उनके अनुसार, इस यात्रा का एक उद्देश्य भारत के साथ संघर्ष के दौरान ईरानी नेतृत्व की ओर से मिले समर्थन के लिए धन्यवाद देना भी था। हालांकि पाकिस्तान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित समर्थन किस रूप में दिया गया था।

सैन्य मदद का कोई स्पष्ट विवरण नहीं

पाकिस्तान के इस दावे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इशाक डार ने ईरान की ओर से दिए गए कथित समर्थन की प्रकृति के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। यह साफ नहीं किया गया कि ईरान ने पाकिस्तान को सैन्य, खुफिया या कूटनीतिक स्तर पर किस तरह की सहायता उपलब्ध कराई थी।

ऐसे में डार के बयान को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर इसलिए क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान की सार्वजनिक स्थिति दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील वाली रही थी।

ईरान ने दोनों देशों से संयम की अपील की थी

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने भारत और पाकिस्तान दोनों से तनाव कम करने और संयम बरतने का आग्रह किया था। उस समय ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की यात्रा की थी। उन्होंने दोनों देशों के साथ ईरान के मित्रवत संबंधों का उल्लेख करते हुए बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया था।

इस पृष्ठभूमि में पाकिस्तान का यह दावा कि ईरान ने संघर्ष के दौरान उसका मजबूत समर्थन किया था, सवालों के घेरे में है। उपलब्ध सार्वजनिक बयानों में ईरान की ओर से किसी प्रत्यक्ष सैन्य सहायता का स्पष्ट उल्लेख सामने नहीं आया था।

भारत ने पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ने का किया था दावा

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ओर से लगातार यह कहा गया था कि पाकिस्तान कूटनीतिक स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था। भारत ने दावा किया था कि कई देशों ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ उसके रुख और आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बाद में संसद में बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिला। उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से पाकिस्तान को छोड़कर केवल कुछ देशों ने भारत के रुख का विरोध किया था।

7-8 मई की रात शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 और 8 मई 2025 की दरमियानी रात हुई थी। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी।

पहलगाम हमले में आतंकियों ने लोगों की पहचान पूछकर हमला किया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब देने की बात कही थी। अब पाकिस्तान के ईरान संबंधी दावे ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्षेत्रीय देशों की भूमिका को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। हालांकि ईरान की वास्तविक भूमिका को लेकर पाकिस्तान की ओर से दिए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

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