Operation Sindoor: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े अहम पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान अचानक सीजफायर के लिए इसलिए मजबूर हुआ क्योंकि उसे भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना की समन्वित तैयारियों का स्पष्ट अंदाजा हो गया था। पाकिस्तान ने हालात को भांपते हुए समय रहते कदम पीछे खींच लिया।
तीनों सेनाओं को मिले निर्देश बने टर्निंग पॉइंट
जनरल द्विवेदी ने कहा कि 10 मई की सुबह तीनों सेनाओं को मूवमेंट के लिए जरूरी निर्देश मिल चुके थे। पाकिस्तान ने इन गतिविधियों को आपस में जोड़कर स्थिति की गंभीरता समझ ली। उन्हें यह साफ हो गया था कि भारत की तैयारी केवल संकेतात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई की ओर बढ़ रही है। यही वह मोड़ था, जिसने सीजफायर को पाकिस्तान के लिए अनिवार्य बना दिया।सेना प्रमुख के अनुसार, पाकिस्तान को इमेजरी और अन्य माध्यमों से यह जानकारी मिल गई थी कि किस दिशा से शिप, वॉरशिप, एयरक्राफ्ट और अन्य सैन्य संसाधनों की तैनाती हो रही है। इस व्यापक सैन्य मूवमेंट ने पाकिस्तान को संकेत दे दिया कि यदि उसने कोई भी रणनीतिक गलती की, तो भारत पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ सकता है।
न्यूक्लियर बयानबाजी पर सेना का स्पष्ट रुख
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक अन्य सवाल पर जनरल द्विवेदी ने न्यूक्लियर बयानबाजी को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि DGMO स्तर की बातचीत में परमाणु हथियारों को लेकर किसी भी तरह की चर्चा नहीं हुई। जो भी न्यूक्लियर बयान सामने आए, वे पाकिस्तान के नेताओं या वहां की आम जनता की ओर से थे, न कि वहां की सेना की तरफ से।जनरल द्विवेदी ने बताया कि उन 88 घंटों के दौरान भारतीय सेना की तैनाती इस तरह की गई थी कि पारंपरिक सैन्य दायरे को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान ने कोई भी गलत कदम उठाया होता, तो भारतीय सेना जमीनी ऑपरेशन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। यह तैयारी भारत की रणनीतिक क्षमता को दर्शाती है।
उत्तरी सीमा और LAC पर स्थिति स्थिर लेकिन सतर्कता जरूरी
सेना प्रमुख ने बताया कि उत्तरी सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हालात फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन पूरी सतर्कता बरती जा रही है। उच्च स्तरीय बातचीत और विश्वास बहाली के उपायों से स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि घास चराई और हाइड्रोथेरेपी कैंप जैसी गतिविधियां फिर से शुरू हो चुकी हैं।पश्चिमी मोर्चे और जम्मू-कश्मीर को लेकर जनरल द्विवेदी ने कहा कि स्थिति संवेदनशील जरूर है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। सेना की तैनाती संतुलित और मजबूत है, ताकि किसी भी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
आतंकवाद पर बड़ी सफलता: ऑपरेशन महादेव
जनरल द्विवेदी ने आतंकवाद के खिलाफ मिली सफलता की जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2025 में अब तक 31 आतंकवादियों को मार गिराया गया है, जिनमें से लगभग 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के थे। उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले के तीनों आतंकियों को ऑपरेशन महादेव के तहत ढेर कर दिया गया है। वर्तमान में सक्रिय स्थानीय आतंकवादियों की संख्या सिंगल डिजिट में सिमट गई है, जो सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि है।










