Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चल रही अटकलों पर स्पष्ट बयान दिया है। एबीपी न्यूज के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल या किसी भी अन्य परमाणु ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय वायुसेना की कार्रवाई पूरी तरह सीमित और सटीक थी, जिसका उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे और चुनिंदा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना था।
पाकिस्तान की ओर से दुष्प्रचार की आशंका
एयर मार्शल कपूर ने संकेत दिया कि परमाणु ठिकानों पर हमले की खबरें भ्रामक हो सकती हैं। उनके मुताबिक, ऐसी सूचनाएं या तो पाकिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठनों द्वारा फैलाई गई होंगी या फिर यह पाकिस्तान की सूचना युद्ध (इंफो वॉरफेयर) रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है—आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर आतंकी हमले का सख्त जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि भारतीय वायुसेना अंतरराष्ट्रीय मानकों और जिम्मेदार सैन्य आचरण का पालन करती है।
कार्रवाई रही सीमित और लक्ष्य आधारित
वाइस चीफ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत जो भी सैन्य कार्रवाई की गई, वह बेहद सोच-समझकर और रणनीतिक ढंग से अंजाम दी गई। इसका उद्देश्य केवल उन ठिकानों को नुकसान पहुंचाना था, जहां से भारत विरोधी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी परमाणु ढांचे को निशाना बनाने की नीति नहीं अपनाई है और न ही इस ऑपरेशन में ऐसा कुछ किया गया। यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ एक सटीक और नियंत्रित जवाब थी।
‘सुदर्शन चक्र’ को बताया शक्ति प्रदर्शन
एयर मार्शल नागेश कपूर ने ‘सुदर्शन चक्र’ को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नियमित सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि वायुशक्ति का प्रदर्शन है। उनके शब्दों में, “यह एक्सरसाइज नहीं, बल्कि एक डिमॉन्स्ट्रेशन है।” ऑपरेशन सिंदूर के बाद वायुसेना ने कई सामरिक गतिविधियां की हैं ताकि अपनी तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत किया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लंबी दूरी की टार्गेटिंग क्षमताओं का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जा सकता।
27 फरवरी को जैसलमेर में ‘वायुशक्ति’ युद्धाभ्यास
इस महीने 27 फरवरी को राजस्थान के जैसलमेर में ‘वायुशक्ति’ नामक भव्य युद्धाभ्यास आयोजित किया जाएगा। यह इलाका पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित है। यह अभ्यास हर दो साल में आयोजित किया जाता है, जिसमें भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता, सटीकता और ऑपरेशनल दक्षता का प्रदर्शन करती है। इस कार्यक्रम से पहले ‘कर्टन रेजर’ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें वाइस चीफ ने मीडिया को विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर ‘वायुशक्ति’ का एक टीजर वीडियो भी जारी किया गया।
भारी हथियारों और विमानों की होगी भागीदारी
आगामी ‘वायुशक्ति’ अभ्यास में कुल 277 हथियारों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 12 हजार किलोग्राम विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल होगा। इस युद्धाभ्यास में 77 फ्रंटलाइन लड़ाकू विमान, 43 हेलीकॉप्टर और 8 ट्रांसपोर्ट विमान हिस्सा लेंगे। यह आयोजन भारतीय वायुसेना की सामरिक तैयारी, तकनीकी दक्षता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता का व्यापक प्रदर्शन होगा। वायुसेना का उद्देश्य यह संदेश देना है कि देश की सुरक्षा के लिए वह हर परिस्थिति में तैयार है।









