UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया है। ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अखिलेश को ‘राजा बाबू’ कहकर संबोधित किया और पूछा कि आखिर समाजवादी पार्टी के भीतर क्या चल रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के यादव कार्यकर्ता पार्टी के भीतर कुर्मी समाज के नेतृत्व को स्वीकार करने में अक्षम साबित हो रहे हैं।
गैर-यादव नेताओं के अपमान पर सियासत तेज
बताते चले कि, ओपी राजभर ने सपा के भीतर हो रही कथित गुटबाजी और जातिगत भेदभाव के कई उदाहरण पेश किए। उन्होंने चंदौली में जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल के साथ मारपीट, बांदा में सपा विधायक द्वारा सांसद कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल को गाली देने और प्रयागराज में स्वयं अखिलेश यादव की उपस्थिति में विधायक संदीप पटेल के विरोध जैसी घटनाओं को गिनाया। राजभर ने इन घटनाओं को सपा के ‘यादववादी’ चरित्र का प्रमाण बताते हुए कहा कि गैर-यादव नेताओं के साथ हो रहा दुर्व्यवहार पार्टी की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
कुर्मी समाज के स्वाभिमान को लेकर चेतावनी
अपनी तीखी बयानबाजी जारी रखते हुए ओपी राजभर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जल्द ही अंबेडकरनगर में भी ऐसी ही घटना दोहराई जा सकती है। उन्होंने समाजवादी पार्टी को ‘यादववादी पार्टी’ (यपा) करार देते हुए कहा कि अब कुर्मी समुदाय के नेता यह समझ चुके हैं कि उन्हें इस दल में सम्मान नहीं, बल्कि अपमान और मारपीट ही नसीब होगी। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कुर्मी समाज अपनी भूमिका तय कर चुका है, जिसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा।
माफिया राज की वापसी पर राजभर की चेतावनी
आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजभर ने सपा पर गुंडागर्दी और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि सपा समर्थकों का एक वर्ग लाठी, चाकू और तलवारों को तैयार कर रहा है ताकि सरकार बनते ही थानों पर कब्जा किया जा सके। राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख के मन में पिछले 10 वर्षों से जो प्रतिशोध की भावना पल रही है, वह केवल सत्ता के माध्यम से ‘माफिया और गुंडे-मवालियों’ को संरक्षण देने का एक कुत्सित प्रयास है।
चुनावी रणनीतियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर
ओम प्रकाश राजभर का यह आक्रामक रुख स्पष्ट करता है कि आगामी चुनाव से पूर्व वे सपा के वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। राजभर लगातार अखिलेश यादव की नेतृत्व शैली पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में भाजपा गठबंधन और सपा के बीच का यह वाकयुद्ध और अधिक तीव्र होने वाला है। राजभर के इन दावों ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।










