UP Politics: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की हालिया मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इस कड़ी में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा हमला बोला है। ओपी राजभर ने व्यंग्यात्मक लहजे में सलाह दी कि शंकराचार्य को अपनी धार्मिक मर्यादा छोड़कर कुर्ता-पायजामा सिलवा लेना चाहिए और गाड़ी पर सपा का झंडा लगाकर मैदान में उतरना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एक शंकराचार्य का काम धर्म का प्रचार करना है, न कि राजनीति में हस्तक्षेप करना। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हीं लोगों (समाजवादियों) ने बनारस में शंकराचार्य को पिटवाया था, फिर भी वे उनके साथ जुड़ रहे हैं।
शंकराचार्य के आरोपों पर घमासान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के हालिया बयानों, जिनमें उन्होंने पीएम मोदी और चंपत राय पर राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठाए थे और सीएम योगी को ‘कालनेमि’ तक कह दिया था, पर राजभर ने कड़ी नाराजगी जताई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान गौ-माता को राष्ट्र माता बनाने और सनातन धर्म से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की थी, जिसके बाद से ही वे भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों के निशाने पर आ गए हैं। राजभर का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी केवल राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य सरकार की छवि को धूमिल करना है।
विवादित मुद्दों पर मंत्री का रुख
सोनम वांगचुक के अनशन और उन्हें अस्पताल शिफ्ट किए जाने के मामले पर राजभर ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए जो निर्णय लिया गया, वह पूरी तरह से उचित और मानवीय आधार पर था। वहीं, आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रही बुलडोजर कार्रवाई पर राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ही सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में सरकारी जमीन को हथियाकर यह संस्थान खड़ा किया गया, जो अब नियमों के तहत ढहाया जा रहा है। राजभर ने इसे सपा द्वारा की गई साजिश बताया, जिसमें आजम खान के साथ-साथ अखिलेश यादव की भी संलिप्तता है।
भविष्य की राजनीति पर राजभर का स्पष्ट स्टैंड
उत्तर प्रदेश में एनडीए के घटक दलों के बीच सीटों के दावे और खींचतान पर ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि कोई भी सीट किसी की ‘रजिस्ट्री’ नहीं है। उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा और दावेदारी का फैसला बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन और गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व मिलकर तय करेगा। अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर राजभर ने एक बार फिर जता दिया है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर वे गठबंधन के भीतर अपनी स्थिति और अपनी पार्टी के महत्व को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। राजभर का यह बयान स्पष्ट करता है कि राज्य की राजनीति में अब हर मुद्दे पर गठबंधन एक ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।










