Budget 2026: संसद के शीतकालीन सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर कड़ा पलटवार किया। ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि सदन का संचालन किसी के इशारे पर नहीं, बल्कि स्थापित नियम-पुस्तिका के आधार पर होता है। यह विवाद तब और गहरा गया जब राहुल गांधी ने पत्र लिखकर अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।
संसदीय नियमों और प्रक्रिया की गरिमा सर्वोपरि
बताते चले कि, बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष का कड़ा रुख देखने को मिला। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सदन में किसे बोलने की अनुमति देनी है और किसे नहीं, यह केवल नियम और प्रक्रियाओं से तय होता है। दरअसल, राहुल गांधी ने मंगलवार को अध्यक्ष को एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकार के दबाव में बोलने से रोका जा रहा है, जिसे उन्होंने लोकतंत्र पर एक ‘काला धब्बा’ करार दिया था। बिरला ने इन आरोपों को खारिज करते हुए संसदीय मर्यादा का पाठ पढ़ाया।
हंगामे के बीच सरकारी कामकाज और विपक्षी सदस्यों का शोर
आपको बता दे कि, दोपहर 12 बजे जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई, तो नजारा काफी अफरातफरी भरा था। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वक्तव्य देने खड़े हुए, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा इतना बढ़ गया कि विपक्षी सदस्य न केवल आसन के निकट (वेल में) आ गए, बल्कि कुछ सदस्य सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्तियों की ओर भी बढ़ गए। शोर-शराबे के बीच ही मंत्री ने अपना वक्तव्य पूरा किया, जबकि विपक्ष लगातार सरकार विरोधी नारे लगाता रहा।
वरिष्ठ नेताओं के आचरण और लोकतांत्रिक परंपराओं पर सवाल
ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों के व्यवहार पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “आप लंबे समय तक शासन में रहे हैं, इसके बावजूद आप सदन की परंपराओं और मर्यादाओं को खंडित कर रहे हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सदस्य सत्तापक्ष की सीटों की तरफ जाकर विरोध करेंगे, तो इससे आम जनता का लोकतंत्र के प्रति विश्वास कम होगा। बिरला ने जोर देकर कहा कि विरोध करने का एक तरीका होता है, लेकिन गरिमा लांघना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
सार्थक बहस बनाम नारेबाजी और बैनर की राजनीति
अध्यक्ष ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध नारेबाजी या बैनर दिखाने से नहीं, बल्कि ठोस तर्कों और चर्चा से प्रभावी होता है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि सदस्य मंत्रियों के भाषण के दौरान बाधा डाल रहे हैं और सदन के एक तरफ से दूसरी तरफ जाकर अशांति फैला रहे हैं। बिरला के अनुसार, पहले भी कड़ा विरोध होता रहा है, लेकिन वर्तमान में जिस तरह से मर्यादाएं तोड़ी जा रही हैं, वह विधायी इतिहास में उचित नहीं है।
चीन सीमा विवाद और संस्मरणों पर जारी गतिरोध
इस पूरे विवाद की जड़ में चीन का मुद्दा है। राहुल गांधी पिछले दो दिनों से पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों का हवाला देकर चीन पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। हालांकि, आसन से अनुमति न मिलने के बावजूद उन्होंने मंगलवार को संबंधित लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रखा। इसी विषय को लेकर सदन में गतिरोध बना हुआ है, जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘लोकतंत्र पर काला धब्बा’ वाले आरोप पर स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को बिरला ने स्पष्ट किया कि सदन में बोलने की अनुमति केवल संसदीय नियमों और प्रक्रिया के तहत दी जाती है, न कि किसी बाहरी दबाव में। उन्होंने विपक्षी सांसदों द्वारा सदन की मर्यादा तोड़ने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।










