पुराने स्मार्टफोन बनेंगे मिनी डेटा सेंटर: गूगल का नया कम कार्बन कंप्यूटिंग प्रोजेक्ट

पुराने स्मार्टफोन को कबाड़ समझने की भूल ना करें, अब ये अहम कंप्यूटिंग सिस्टम बन सकते हैं. दरअसल,  गूगल पुराने स्मार्टफोन को कम कार्बन कंप्यूटिंग क्लस्टर में बदलने की योजना बना रहा है, जिसका खुलासा हुआ है. जानकारी के मुताबिक, कंपनी पुराने स्मार्टफोन के कंप्यूटिंग हार्डवेयर को निकालकर क्लाउड एप्लीकेशन और रिसर्च वर्कलोड के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है. आसान शब्दों में समझें तो कंपनी पुराने स्मार्टफोन के चिप, मेमोरी और स्टोरेज को निकालकर कई हजारों डिवाइस को आपस में जोड़ना चाहती है. ऐसा करके एक छोटे डेटा सेंटर की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी की

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Published On :

जून 15, 2026

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पुराने स्मार्टफोन को कबाड़ समझने की भूल ना करें, अब ये अहम कंप्यूटिंग सिस्टम बन सकते हैं. दरअसल,  गूगल पुराने स्मार्टफोन को कम कार्बन कंप्यूटिंग क्लस्टर में बदलने की योजना बना रहा है, जिसका खुलासा हुआ है.

जानकारी के मुताबिक, कंपनी पुराने स्मार्टफोन के कंप्यूटिंग हार्डवेयर को निकालकर क्लाउड एप्लीकेशन और रिसर्च वर्कलोड के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है.

आसान शब्दों में समझें तो कंपनी पुराने स्मार्टफोन के चिप, मेमोरी और स्टोरेज को निकालकर कई हजारों डिवाइस को आपस में जोड़ना चाहती है. ऐसा करके एक छोटे डेटा सेंटर की तरह इस्तेमाल किया जाएगा.

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम से हाथ मिलाया
गूगल ने इसके लिए अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम से हाथ मिलाया है और उसको तैयार किया है. दोनों मिलकर ये रिसर्च कर रहे हैं कि कैसे हजारों रिटायर्ड स्मार्टफोन्स को नए प्रकार के कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म में तब्दील किया जा सकता है.

सब कुछ अगर ठीक रहता है तो इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाले समय में लगभग 2 हजार पुराने Pixel स्मार्टफोन्स से तैयार किया गया एक डेटा सेंटर के रूप में काम कर सकता है.

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गूगल के इस अपकमिंग प्रोजेक्ट को फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग का नाम दिया है. ऑफिशियल ब्लॉग में गूगल ने बताया है कि रिसर्चर स्मार्टफोन से डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा और बाहरी बॉडी जैसी कैटेगरी में कन्वर्ट कर देगा. फिर मदरबोर्ड बचेगा, जिसमें प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज मौजूद होते हैं.

कई स्मार्टफोन के मदरबोर्ड को आपस में कनेक्ट करके उनको Linux ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल किया जाएगा. एक बार सभी डिवाइस कनेक्ट होने के बाद इनको क्लस्टर के रूप में लगाया जा सकेगा.

सभी डिवाइस को Kubernetes प्लेटफॉर्म के जरिए मैनेज किया जा सकेगा, जो एडवांस्ड क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा.

लगभग 25 से 50 स्मार्टफोन्स का एक क्लस्टर होगा, जो कुछ स्पेशल टास्क के लिए एक मॉडर्न सर्वर के बराबर कंप्यूटिंग पावर जनरेट करने की काबिलियत रख सकता है.

रिसर्चर सैकड़ों या हजारों डिवाइसों को आपस में कनेक्ट करके ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहते हैं, जो क्लाउड बेस्ट सर्विस दे सकते हैं.

गूगल का क्या है मकसद?
गूगल का मानना है कि कंप्यूटिंग का कार्बन फुटप्रिंट मुख्य रूप से दो सोर्स से आते हैं. पहला सिस्टम चलाने के दौरान खर्च होने वाली बिजली और दूसरा नए हार्डवेयर के निर्माण के दौरान. ऐसे में कंपनी पुराने हैंडसेट का इस्तेमाल करके कार्बन को कम करना चाहती है.

रिसर्च टीम 2,000 स्मार्टफोन्स का एक कंप्यूटिंग क्लस्टर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसका इस्तेमाल सिस्टम प्रोग्रामिंग और कंप्यूटिंग में किया जाएगा.

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