Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर, पूर्व सीएम ओ. पन्नीरसेल्वम आधिकारिक तौर पर DMK में शामिल

तमिलनाडु की राजनीति ने आज एक नया मोड़ ले लिया है। तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री और जयललिता के सबसे भरोसेमंद रहे ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की उपस्थिति में DMK की सदस्यता ले ली है। इस फैसले ने राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 27, 2026

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त एक ऐतिहासिक मोड़ आया, जब अन्नाद्रमुक (AIADMK) के कद्दावर नेता और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) ने सत्तारूढ़ दल द्रमुक (DMK) का दामन थाम लिया। चेन्नई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की उपस्थिति में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पन्नीरसेल्वम का यह कदम आगामी 2026 विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। जयललिता के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाने वाले नेता का धुर विरोधी खेमे में जाना अन्नाद्रमुक के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।

जयललिता के ‘संकटमोचक’ से ‘विद्रोही’ तक का सफर

ओ. पन्नीरसेल्वम का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल के दौरान उन्हें पार्टी का ‘संकटमोचक’ कहा जाता था। जब भी जयललिता को कानूनी अड़चनों के कारण पद छोड़ना पड़ा, उन्होंने पन्नीरसेल्वम पर ही भरोसा जताया। हालांकि, 2016 में जयललिता के निधन के बाद पार्टी के भीतर वर्चस्व की जंग शुरू हो गई। पन्नीरसेल्वम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के बीच सत्ता संघर्ष इतना बढ़ा कि 2022 में पन्नीरसेल्वम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पिछले तीन वर्षों से वे अपनी मूल पार्टी में वापसी के लिए कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने अंततः द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ जाने का साहसिक निर्णय लिया।

46 वर्षों का नाता और भीतरघात का दर्द

पन्नीरसेल्वम ने डीएमके में शामिल होते समय अपना दर्द साझा करते हुए अन्नाद्रमुक के वर्तमान नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के लिए अपने जीवन के 46 साल समर्पित किए, लेकिन बदले में उन्हें केवल अपमान मिला। पन्नीरसेल्वम ने आरोप लगाया कि पार्टी के संस्थापक एमजी रामचंद्रन (MGR) द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक मूल्यों और नियमों को वर्तमान नेतृत्व ने निजी स्वार्थ के लिए कुचल दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी कि यदि कोई उनकी निष्ठा पर सवाल उठाता है या गलती साबित करता है, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें पार्टी का झंडा और प्रतीकों तक का उपयोग करने से रोका गया, जो एक पूर्व समन्वयक के लिए असहनीय था।

2026 के चुनावी रण में ‘द्रविड़ियन मॉडल’ को मिलेगी मजबूती

तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए 2026 में होने वाले चुनाव अब और भी दिलचस्प हो गए हैं। 2021 के चुनावों में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 159 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। अब पन्नीरसेल्वम के आने से ‘द्रविड़ियन मॉडल 2.0’ के साथ चुनावी मैदान में उतर रही डीएमके को दक्षिण तमिलनाडु के क्षेत्रों में बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। थेनी और मदुरै जैसे इलाकों में पन्नीरसेल्वम का आज भी मजबूत जनाधार है। अभिनेता विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रवेश से जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय होने की उम्मीद थी, वहीं पन्नीरसेल्वम के इस कदम ने विपक्षी एआईएडीएमके और भाजपा की रणनीतियों को हाशिए पर धकेल दिया है।

अन्नाद्रमुक के अस्तित्व पर संकट और भविष्य की राह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पन्नीरसेल्वम का जाना केवल एक व्यक्ति का दलबदल नहीं है, बल्कि यह अन्नाद्रमुक के भीतर एक बड़े धड़े के असंतोष का प्रतीक है। इससे पार्टी के कैडर वोट बैंक में बिखराव तय है। अब देखना यह होगा कि एडप्पादी पलानीस्वामी इस बड़े नुकसान की भरपाई कैसे करते हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री स्टालिन ने पन्नीरसेल्वम का स्वागत कर यह संदेश दिया है कि डीएमके अब राज्य की एकमात्र धुरी बनने की दिशा में अग्रसर है। आने वाले दिनों में तमिलनाडु की सड़कों और विधानसभा की बहसों में इस पाला-बदल का व्यापक असर देखने को मिलेगा, जो राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

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