Nora Fatehi Fatwa: नोरा फतेही के गाने पर अलीगढ़ से फतवा, अश्लीलता पर छिड़ा बड़ा विवाद

नोरा फतेही और संजय दत्त के नए गाने 'सरके चुनर' ने रिलीज होते ही बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अलीगढ़ के धार्मिक हलकों से अश्लीलता के खिलाफ फतवा जारी होने और सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। क्या यह गाना हमेशा के लिए बैन होगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 19, 2026

Nora Fatehi Fatwa:  उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता ने मशहूर बॉलीवुड डांसर और अभिनेत्री नोरा फतेही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में रिलीज हुए फिल्म ‘केडी: द देविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर उपजे विवाद में अब धार्मिक एंगल भी जुड़ गया है। दारुल इफ्ता ने इस गाने की सामग्री को इस्लामिक मूल्यों और सामाजिक नैतिकता के खिलाफ बताते हुए नोरा फतेही के खिलाफ फतवा जारी किया है। इस कदम ने मनोरंजन जगत और धार्मिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है।

अश्लीलता और सांस्कृतिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप

दारुल इफ्ता के मुफ्ती और उलेमाओं का तर्क है कि ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाने में जिस तरह के शब्दों, पहनावे और नृत्य मुद्राओं का प्रयोग किया गया है, वह समाज में गंदगी फैलाने का काम कर रहा है। फतवे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के दौरान मानवीय गरिमा और धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार, यह गाना न केवल अश्लीलता को बढ़ावा देता है, बल्कि युवा पीढ़ी के चरित्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

“तौबा करें और माफी मांगें”: फतवे की मुख्य मांग

मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता की ओर से जारी बयान में नोरा फतेही को कड़ी नसीहत दी गई है। फतवे में कहा गया है कि नोरा को अपनी इन ‘अमर्यादित’ हरकतों के लिए खुदा से तौबा (माफी) करनी चाहिए। उलेमाओं का कहना है कि ग्लैमर के नाम पर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना जो समाज की नैतिकता को खंडित करें, इस्लाम में पूरी तरह वर्जित है। अलीगढ़ के मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने भी इस फतवे का समर्थन करते हुए कहा है कि मनोरंजन की एक सीमा होनी चाहिए।

फिल्म ‘केडी: द देविल’ पर बढ़ा कानूनी और सामाजिक दबाव

यह विवाद फिल्म ‘केडी: द देविल’ के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है, जो अप्रैल 2026 में रिलीज होने वाली है। एक तरफ राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने पहले ही संजय दत्त और नोरा फतेही को समन जारी किया है, और अब अलीगढ़ से आए इस फतवे ने आग में घी डालने का काम किया है। फिल्म के इस गाने को भारी विरोध के बाद पहले ही यूट्यूब से हटाया जा चुका है, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिल्म की टीम अब दोहरे संकट में है—एक तरफ कानूनी कार्रवाई और दूसरी तरफ धार्मिक विरोध।

नोरा फतेही की सफाई और बचाव पक्ष की दलीलें

इस पूरे प्रकरण पर नोरा फतेही ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि उन्होंने यह गाना मूल रूप से कन्नड़ भाषा में तीन साल पहले शूट किया था और उन्हें इसके हिंदी अनुवाद के आपत्तिजनक होने का अंदाजा नहीं था। नोरा के समर्थकों का तर्क है कि कलाकार केवल निर्देशक और कोरियोग्राफर के निर्देशों का पालन करते हैं, और किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना उनका उद्देश्य नहीं होता। हालांकि, फतवा जारी करने वाले संगठन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक आस्था की जंग

अलीगढ़ से जारी यह फतवा एक बार फिर उस पुरानी बहस को जन्म दे रहा है कि रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए। क्या फिल्मों और गानों पर धार्मिक संगठनों का हस्तक्षेप जायज है? या फिर कलाकारों को समाज की संवेदनशीलता का अधिक ध्यान रखना चाहिए? जैसे-जैसे अप्रैल 2026 की रिलीज तारीख नजदीक आ रही है, ‘केडी: द देविल’ की टीम पर इस विवाद को सुलझाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्माता और नोरा फतेही इस सामाजिक और धार्मिक विरोध का सामना कैसे करते हैं।

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