Non Veg Food Prices: अगर आपकी डाइट में अंडे, चिकन, मछली या अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थ नियमित रूप से शामिल हैं, तो आने वाले समय में आपको इन पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। हाल ही में जारी महंगाई के आंकड़े बताते हैं कि जून महीने के दौरान प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। बढ़ती लागत और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण फिलहाल इनकी कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोल्ट्री उद्योग में बढ़ते खर्च, पशु आहार की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का सीधा असर बाजार में मिलने वाले अंडे, चिकन, मछली और अन्य नॉन-वेज उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है।
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किन खाद्य पदार्थों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े?
महंगाई के ताजा आंकड़ों के अनुसार जून महीने में मांस, मछली और अंडे की श्रेणी में कुल कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- अंडों की कीमतों में एक महीने के दौरान लगभग 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- गोमांस और भैंस के मांस के दाम करीब 41 प्रतिशत तक बढ़ गए।
- मछली और झींगा जैसी समुद्री खाद्य वस्तुएं लगभग 90 प्रतिशत महंगी हुईं।
- चिकन, मटन और अन्य मांसाहारी उत्पादों की कीमतों में भी लगातार वृद्धि देखने को मिली।
- कुल मिलाकर मांस, मछली और अंडे की श्रेणी में महंगाई दर लगभग 79 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
इन बढ़ती कीमतों का असर खासकर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो अपनी दैनिक जरूरतों में प्रोटीन के लिए इन खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहते हैं।
सालभर में कितनी बढ़ी कीमतें?
यदि पिछले वर्ष की तुलना की जाए तो कई मांसाहारी खाद्य पदार्थों की कीमतों में दो अंकों तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- गोमांस और भैंस के मांस की सालाना महंगाई लगभग 3 प्रतिशत रही।
- चिकन के दाम पिछले साल की तुलना में करीब 83 प्रतिशत बढ़ गए।
- मछली और झींगा लगभग 7 प्रतिशत महंगे हुए।
- बकरी और भेड़ के मांस की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- वहीं अंडों के दाम भी पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 45 प्रतिशत अधिक हो गए हैं।
यह बढ़ोतरी संकेत देती है कि मांसाहारी खाद्य पदार्थों की कीमतों में लंबे समय से दबाव बना हुआ है।
कीमतें बढ़ने के पीछे क्या कारण हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण इस महंगाई के लिए जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण पोल्ट्री फीड और पशु आहार की बढ़ती लागत है। इसके अलावा परिवहन, उत्पादन और वितरण पर बढ़े खर्च का असर भी बाजार कीमतों पर दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, लोगों में प्रोटीन युक्त भोजन की मांग लगातार बनी हुई है। मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
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क्या आने वाले समय में मिलेगी राहत?
फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ सप्ताह तक अंडे, चिकन और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।हालांकि श्रावण मास और कुछ प्रमुख त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग नॉन-वेज भोजन से परहेज करते हैं। ऐसे समय में मांग कुछ कम हो सकती है, जिससे कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिल सकती है। फिर भी निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को इन खाद्य पदार्थों पर अधिक खर्च करने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। यदि उत्पादन लागत और सप्लाई की स्थिति में सुधार होता है, तभी बाजार में कीमतों में स्थायी राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।










