Aditya Anand Arrested : नोएडा हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद तमिलनाडु से गिरफ्तार, बदला था अपना हुलिया

नोएडा हिंसा के बाद से फरार चल रहे आदित्य आनंद को पुलिस ने आखिरकार तमिलनाडु के एक गुप्त ठिकाने से धर दबोचा। अपनी पहचान छिपाने के लिए उसने अपना पूरा गेटअप बदल लिया था। क्या अब खुलेगा हिंसा के पीछे की बड़ी साजिश का राज? कौन दे रहा था उसे संरक्षण?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 18, 2026

Aditya Anand Arrested :  उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुई भीषण हिंसा की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को पुलिस ने अंततः गिरफ्तार कर लिया है। गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस बड़ी कामयाबी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को नोएडा से करीब 2,400 किलोमीटर दूर तमिलनाडु से पकड़ा गया है। नोएडा में उपद्रव फैलाने के बाद आदित्य कानून की नजरों से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) और नोएडा पुलिस की संयुक्त टीमों ने देश के कई राज्यों में छापेमारी की, जिसके बाद उसे दक्षिण भारत के इस राज्य से धर दबोचा गया।

पहचान छिपाने के लिए बदला गेटअप और काटी दाढ़ी

आदित्य आनंद बेहद शातिर तरीके से पुलिस को चकमा दे रहा था। हिंसा के बाद जब उसके साथी रूपेश राय की गिरफ्तारी हुई, तो आदित्य को अपनी धरपकड़ का डर सताने लगा। पुलिस से बचने के लिए उसने अपनी दाढ़ी और बाल कटवा लिए और अपना पूरा हुलिया (गेटअप) बदल दिया। इस बदले हुए भेष में ही वह ट्रेन और अन्य साधनों के जरिए तमिलनाडु फरार हो गया था। पुलिस के अनुसार, वह वहां छिपकर रहने की फिराक में था ताकि मामला शांत होने तक वह पुलिस की रडार से बाहर रह सके, लेकिन तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।

मजदूरों को भड़काने और हिंसा संगठित करने का गंभीर आरोप

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि नोएडा की हिंसा कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि यह ‘मैलाफाइड इंटेंशन’ यानी दुर्भावनापूर्ण इरादे से की गई एक संगठित गतिविधि थी। आदित्य आनंद, मनीषा चौहान और रूपेश राय ने मिलकर भोले-भाले मजदूरों को उकसाने और उन्हें कानून हाथ में लेने के लिए प्रेरित करने का काम किया था। जांच में सामने आया है कि आदित्य और रूपेश पिछले कई वर्षों से देशभर में घूम रहे थे और जहाँ कहीं भी विरोध प्रदर्शन या आंदोलन होता था, ये लोग वहां पहुँचकर माहौल बिगाड़ने का काम करते थे।

शातिर अपराधी: खुद को कभी बेरोजगार तो कभी ऑटो ड्राइवर बताया

आदित्य आनंद और उसके साथियों की पृष्ठभूमि भी काफी संदिग्ध पाई गई है। रूपेश राय जहाँ खुद को एक साधारण ऑटो ड्राइवर बताता था, वहीं आदित्य आनंद खुद को बेरोजगार बताता था। हालांकि, इनकी गतिविधियाँ किसी पेशेवर आंदोलनकारी से कम नहीं थीं। आदित्य 2020 से और रूपेश 2018 से देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले आंदोलनों में सक्रिय पाए गए हैं। इससे पहले इन लोगों ने मानेसर हिंसा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनका मुख्य उद्देश्य मजदूर संगठनों के भीतर असंतोष पैदा करना और शांतिपूर्ण विरोध को हिंसक झड़पों में तब्दील करना था।

साजिश की पूरी टाइमलाइन: व्हाट्सऐप ग्रुप से लेकर सोशल मीडिया तक

नोएडा हिंसा की पटकथा कई दिनों पहले से लिखी जा रही थी। 31 मार्च और 1 अप्रैल को इन आरोपियों ने नोएडा में अपनी सक्रियता बढ़ाई। 9 और 10 अप्रैल को बाकायदा QR कोड साझा कर व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए ताकि मजदूरों को संगठित किया जा सके। 11 अप्रैल को जब प्रशासन के साथ मजदूरों का समझौता शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया, तो आदित्य और उसकी टीम ने उत्तेजित भाषण देकर उन्हें फिर से भड़का दिया। अंततः 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के बाहर मजदूरों को इकट्ठा किया गया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर फर्जी खबरें फैलाकर हिंसा को अंजाम दिया गया।

निष्कर्ष: कानून का शिकंजा और सख्त कार्रवाई का संदेश

आदित्य आनंद की गिरफ्तारी नोएडा पुलिस के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह देश के किसी भी कोने में जाकर छिप जाए। इस गिरफ्तारी से उन ताकतों को कड़ा संदेश गया है जो विकास कार्यों में बाधा डालने और मजदूरों को ढाल बनाकर हिंसा फैलाने का काम करते हैं। अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी संगठित साजिश को रोका जा सके।

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