Noida Building Fire: उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नोएडा फेज-3 थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेक्टर-66 स्थित ममूरा गाँव की एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत में बुधवार को अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बहुमंजिला इमारत को धुएं के गुबार ने घेर लिया, जिसके चलते बिल्डिंग के भीतर रह रहे करीब 50 से अधिक परिवार वहीं फंस गए और वहां चीख-पुकार मच गई। इस भीषण अग्निकांड में झुलसने और दम घुटने के कारण दो लोगों की मौत हो गई है, जिनमें एक 26 वर्षीय महिला स्नेहा और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति शामिल है।
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों को तुरंत घटना स्थल पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) चलाने के कड़े निर्देश दिए। सीएम ने अधिकारियों से घायलों को तत्काल समुचित इलाज उपलब्ध कराने और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की निरंतर मॉनिटरिंग करने को कहा है।
इलेक्ट्रिक बाइक या एसी में शॉर्ट सर्किट से हादसा
शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर इस भीषण रिहायशी इमारत हादसे के दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि या तो इमारत के नीचे खड़ी किसी इलेक्ट्रिक बाइक में चार्जिंग के दौरान ब्लास्ट हुआ या फिर किसी फ्लैट के एयर कंडीशनर (AC) में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से यह हादसा हुआ। आग लगने के बाद जब पूरी बिल्डिंग में धुआं भर गया, तो पास ही दुकान चलाने वाले अमन नाम के एक स्थानीय दुकानदार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला। अमन ने तुरंत शोर मचाकर इमारत और आसपास के लोगों को अलर्ट किया, जिससे बड़ी संख्या में लोग समय रहते बाहर निकलने में कामयाब रहे। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
फायर फाइटर्स ने सूझबूझ का परिचय देते हुए जलती हुई पांच मंजिला इमारत और उसके ठीक सामने वाली बिल्डिंग के बीच लोहे की सीढ़ियां लगाईं। इस बेहद खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए दमकल कर्मियों ने सूझबूझ से 100 से अधिक फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान डीसीपी समेत जिले के तमाम वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी राहत कार्य की निगरानी के लिए मौके पर मुस्तैद रहे।
पुलिस की कार्रवाई से जनता में आक्रोश
अग्निशमन विभाग द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया, लेकिन हादसे के बाद स्थानीय पुलिस की एक कार्रवाई ने वहां रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। फेज-3 पुलिस ने घटना से जुड़े साक्ष्यों और सबूतों को सुरक्षित रखने के मकसद से पूरी पांच मंजिला इमारत के मुख्य द्वार (Main Gate) को सील कर दिया है। पुलिस के इस सख्त कदम की वजह से वहां रहने वाले सैकड़ों किरायेदार और गरीब परिवार बेघर हो गए हैं। भीषण गर्मी में लोग पुलिस प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें कम से कम एक बार अपने कमरों में जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे यह देख सकें कि उनका कितना नुकसान हुआ है और उनका बचा हुआ सामान सुरक्षित है या नहीं। संपत्ति के भारी नुकसान के बाद बेबसी के आलम में लोग अब अपने जले और बचे हुए सामान को समेटकर दूसरी सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए मजबूर हैं।
थाना पुलिस की बर्बरता पर भड़का हंगामा
इस बेहद संवेदनशील और दर्दनाक हादसे के बीच पुलिस के एक अधिकारी के कथित संवेदनहीन और अमानवीय व्यवहार ने स्थिति को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का आरोप है कि इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाली 26 वर्षीय युवती स्नेहा का भाई जब रोता-बिलखता हुआ अपनी बहन के कमरे से उसका जरूरी सामान निकालने की मिन्नतें कर रहा था, तब वहां तैनात एक पुलिस अधिकारी भड़क गए।
तैश में आकर उस अधिकारी ने पीड़िता के भाई को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया। पुलिस की इस बर्बरता को देख मुख्य गेट पर मौजूद अन्य स्थानीय नागरिक और पीड़ित आगबबूला हो गए। लोगों ने पुलिस अधिकारी के इस अशोभनीय व्यवहार का कड़ा विरोध किया, जिसके चलते मौके पर भारी हंगामा और बवाल शुरू हो गया। स्थानीय निवासी अब दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।










