Noida Labour Protest: नोएडा बवाल के बाद एक्शन में सरकार, मजदूरों के मुद्दे पर हाई लेवल कमेटी गठित

नोएडा में हुए मजदूरों के उग्र प्रदर्शन के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। अब सवाल यह है कि क्या यह समिति मजदूरों की समस्याओं का समाधान कर पाएगी या विवाद और बढ़ेगा, जानिए इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 13, 2026

Noida Labour Protest: नोएडा में हाल ही में फैक्टरी कर्मचारियों द्वारा वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया और श्रमिकों तथा उद्योगों के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए कदम उठाए।

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी उच्च स्तरीय समिति

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना और औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि संवाद और आपसी समझ के जरिए ही इस तरह के विवादों का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

समिति की संरचना और जिम्मेदारियां

इस समिति की जिम्मेदारी औद्योगिक विकास आयुक्त को सौंपी गई है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई) और श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव को भी इसमें शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इस समिति में श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधि और उद्योग संगठनों के तीन प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और निर्णय संतुलित तरीके से लिया जा सके।

क्या होगा समिति का मुख्य काम

यह समिति मजदूरों और उद्योगों के बीच चल रहे विवादों को बातचीत और सहमति के जरिए हल करने का प्रयास करेगी। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में इस तरह के टकराव की स्थिति पैदा न हो और औद्योगिक माहौल स्थिर बना रहे। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से श्रमिकों की समस्याओं का समाधान होगा और उद्योगों का कामकाज भी सुचारू रूप से चलता रहेगा।

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मजदूरों की मुख्य मांगें क्या हैं

मजदूरों की मुख्य मांगें क्या हैं
मजदूरों की मुख्य मांगें क्या हैं

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की गारमेंट फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी हरियाणा के समान वेतन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण वर्तमान वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

मजदूरों ने न्यूनतम वेतन के लिए निम्न दरों की मांग की है:

  • अकुशल श्रमिक: ₹15,220 प्रति माह
  • अर्ध-कुशल श्रमिक: ₹16,780 प्रति माह
  • कुशल श्रमिक: ₹18,500 प्रति माह
  • उच्च कुशल श्रमिक: ₹19,425 प्रति माह

वेतन अनियमितता बना मुख्य कारण

मजदूरों का आरोप है कि एक ही काम के लिए अलग-अलग कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। इसी असमानता ने आंदोलन को जन्म दिया।

अन्य प्रमुख मांगें

मजदूरों ने वेतन वृद्धि के अलावा कई अन्य मांगें भी रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • वेतन में अनियमितता को पूरी तरह खत्म किया जाए
  • कंपनियां सरकारी नियमों के अनुसार वेतन दें
  • बिना ठोस कारण के नौकरी से न निकाला जाए
  • हर महीने कम से कम चार छुट्टियां सुनिश्चित की जाएं
  • ओवरटाइम का भुगतान तय नियमों के अनुसार किया जाए

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समाधान की दिशा में सरकार की कोशिश

सरकार की इस पहल को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह समिति मजदूरों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाते हुए किस तरह से समाधान निकालती है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में कितनी सफल होती है।