Nitish Kumar Resignation: नीतीश कुमार के इस्तीफे पर बोले जीतन राम मांझी- ‘तहरा जईसन केहू नईखें’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफे के बाद बिहार में नए सीएम को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार को नए बिहार का सृजनकर्ता बताया है। वहीं खरमास के बाद नेतृत्व परिवर्तन और सम्राट चौधरी को कमान मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 30, 2026

Nitish Kumar Resignation: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विधान परिषद (एमएलसी) के पद से इस्तीफा देने के बाद एक बार फिर भारी हलचल है। इस बड़े सियासी घटनाक्रम पर सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी की बेहद दिलचस्प प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की है। मांझी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “तहरा जईसन केहू नईखें, तू बे-जोड़ बाड़ा हो…आपके मार्गदर्शन से ही बिहार चलेगा नीतीश जी। आप इस नए बिहार के सृजनकर्ता हैं।” मांझी के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में कयासों का बाजार और गर्म हो गया है।

क्या बिना सदन सदस्य रहे सीएम बने रहेंगे नीतीश कुमार?

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन और नए सीएम के चेहरे को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी और पार्टी नेता पिछले कुछ दिनों से लगातार संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दे रहे हैं। वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार जैसे नेताओं के हालिया बयानों ने संकेत दिया है कि कोई भी व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य रहे भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री के पद पर आसीन रह सकता है। इस तकनीकी पहलू ने राजनीतिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।

खरमास के बाद संभावित नेतृत्व परिवर्तन

राजनीतिक विश्लेषकों और एनडीए के अंदरूनी सूत्रों के बीच यह चर्चा बेहद आम है कि जेडीयू इतनी आसानी से मुख्यमंत्री की गद्दी अपने हाथ से जाने नहीं देगी। जेडीयू के पास भाजपा से सिर्फ चार विधायक ही कम हैं, ऐसे में वह अपने सहयोगी दल के मुख्यमंत्री के दावे को आसानी से स्वीकार करने से पहले कड़ा रुख अपना सकती है। हालांकि, कयास यह भी हैं कि नीतीश कुमार को अगले महीने की शुरुआत में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि हिंदू पंचांग के अनुसार अशुभ माने जाने वाले खरमास (14 अप्रैल) के खत्म होने के बाद ही प्रदेश में कोई बड़ा नेतृत्व परिवर्तन या फेरबदल संभव हो पाएगा।

क्या बिहार को मिलेगा पहला भाजपाई मुख्यमंत्री?

लगातार बदलते इन घटनाक्रमों के बीच भाजपा खेमे में अपने ‘खुद के मुख्यमंत्री’ की संभावना को लेकर भारी उत्साह और जोश देखा जा रहा है। हिंदी पट्टी के इस बेहद महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से जागरूक राज्य में लगभग दो दशकों से सत्ता में जूनियर या सीनियर पार्टनर रहने के बावजूद भाजपा को आज तक कभी भी अपने दम पर मुख्यमंत्री पद नसीब नहीं हुआ है। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता और नेता इस मौके को भुनाने के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रहे हैं।

सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक चर्चा में

बिहार के सर्वोच्च राजनीतिक पद के संभावित दावेदारों में वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। कोइरी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी एक मजबूत ओबीसी नेता माने जाते हैं। उनके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय का नाम भी लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। हालांकि, भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सम्राट चौधरी को संघ (RSS) के भीतर शायद उतना मजबूत समर्थन न मिले, क्योंकि वे साल 2017 में भाजपा में शामिल होने से पहले लंबे समय तक आरजेडी और जेडीयू में रह चुके हैं।

निशांत कुमार के डिप्टी सीएम बनने की चर्चा

पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नए नेता का चुनाव भले ही विधायकों की आधिकारिक बैठक में किया जाएगा, लेकिन अंतिम मुहर दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ही लगाई जाएगी। राजस्थान में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाने का उदाहरण देकर बताया जा रहा है कि दिल्ली से कोई भी चौंकाने वाला नाम आ सकता है। वहीं दूसरी ओर, जेडीयू के सूत्रों का कहना है कि वे नई सरकार के गठन में अपनी “उचित हिस्सेदारी” पर पूरा जोर देंगे। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी सुगबुगाहट है कि हाल ही में सक्रिय हुए नीतीश कुमार के सुपुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।