Nitin Nabin BJP President: 45 साल के नितिन नबीन के हाथ भाजपा की कमान; क्या होगा 2029 का मास्टरप्लान?

नितिन नबीन भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं। निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही उनके सामने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भाजपा का परचम लहराने की कठिन चुनौती है। क्या एक युवा चेहरा भाजपा को नए शिखर पर ले जा पाएगा?

Nitin Nabin BJP President

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 19, 2026

_+-_– भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। इस मौके पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्री तथा राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे।निर्वाचन अधिकारी लक्ष्मण के अनुसार, नितिन नबीन के पक्ष में 37 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं। 45 वर्षीय नबीन के अध्यक्ष चुने जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। वह बीजेपी के 12वें और सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। उनका कार्यकाल तीन साल के लिए होगा।

अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की बड़ी जिम्मेदारियां

BJP अध्यक्ष बनने के साथ ही नबीन को कई बड़ी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा। इनमें विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव, 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी, महिला आरक्षण और जाति जनगणना से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। ये सभी चुनौतियां देश की राजनीति का नया स्वरूप तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

बीजेपी ने दिसंबर में किया था चौकाने वाला निर्णय

बीजेपी ने दिसंबर 2025 में नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया था। पांच बार के विधायक नबीन को इससे पहले भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव का पद मिला था। इस जिम्मेदारी में उन्होंने अपनी कार्यकुशलता की छाप छोड़ी थी।छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सहप्रभारी बनाकर नबीन को प्रचार और चुनाव प्रबंधन की रणनीति बनाने में अहम जिम्मेदारी दी गई थी। इसी कामयाबी के बाद उन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। नबीन बिहार के पहले नेता और बीजेपी के पहले कायस्थ अध्यक्ष होंगे।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और बीजेपी की चुनौतियां

नितिन नबीन ऐसे समय अध्यक्ष बन रहे हैं जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में बीजेपी आज तक सरकार नहीं बना पाई है। असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाने की चुनौती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जुलाई से अब तक पश्चिम बंगाल का चार बार, असम का तीन और तमिलनाडु का दो बार दौरा किया है। असम में बीजेपी को कांग्रेस के नेतृत्व वाले आठ दलों के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है। बीजेपी का लक्ष्य 126 सीटों वाली असम विधानसभा में 100 सीटें जीतना है।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में बीजेपी की रणनीति

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस लगातार तीन बार सत्ता में है। अगर वे चौथी बार जीतती हैं, तो यह देश में लगातार चार बार मुख्यमंत्री बनने वाली पहली नेता होंगी। तमिलनाडु में बीजेपी ने डीएमके सरकार को हटाने के लिए एआईडीएमके के साथ गठबंधन किया है।तीन मुख्य पार्टियों के बीच होने वाली चुनावी लड़ाई में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्ती कषगम भी शामिल होगी। पिछले साल लोकसभा चुनाव में बीजेपी तमिलनाडु में 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन कोई सीट जीत नहीं पाई।

केरल और पुडुचेरी में बीजेपी की चुनौती

केरल में लेफ्ट की सरकार है और बीजेपी ने अब तक कोई विधानसभा सीट नहीं जीती। पुडुचेरी में बीजेपी ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला रही है। इन राज्यों में बीजेपी का प्रदर्शन सुधारना नबीन की बड़ी चुनौती होगी।

Read More: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राजा भैया और भानवी सिंह विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट को मिली समय सीमा