Biju Patnaik Controversy : निशिकांत दुबे ने मांगी बिना शर्त माफी, कहा- ‘बीजू बाबू हमेशा हमारे लिए महानायक रहेंगे’

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि 1962 के युद्ध के दौरान बीजू पटनायक नेहरू और सीआईए के बीच 'कड़ी' थे। इस बयान पर नवीन पटनायक और बीजेडी के तीखे विरोध के बाद, दुबे ने आज एक्स (X) पर माफी मांगते हुए इसे गलतफहमी करार दिया है।

Biju Patnaik Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 1, 2026

Biju Patnaik Controversy : ओडिशा के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के खिलाफ की गई एक विवादास्पद टिप्पणी ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में बढ़ते विरोध को देखते हुए अंततः सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बिना शर्त माफी मांग ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनके मन में बीजू बाबू के प्रति अगाध सम्मान है। हालांकि, इस माफीनामे से पहले ओडिशा की सड़कों से लेकर विधानसभा तक भारी हंगामा देखने को मिला, जहाँ विपक्ष ने भाजपा सरकार को जमकर घेरा।

निशिकांत दुबे का स्पष्टीकरण: “गलत अर्थ निकाला गया, बीजू बाबू महान स्टेट्समैन”

विवाद गहराने के बाद निशिकांत दुबे ने सार्वजनिक रूप से अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार की आलोचना करते समय उनके संदर्भ को गलत तरीके से बीजू पटनायक से जोड़ दिया गया। दुबे ने जोर देकर कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार था और बीजू बाबू भारत के उन अग्रणी नेताओं में शामिल हैं जिनका कद बहुत ऊँचा है। उन्होंने लिखा, “मेरे बयान से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं बेशर्त क्षमा चाहता हूँ। वे हमेशा हमारे लिए एक महान स्टेट्समैन रहेंगे।” सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य बीजू बाबू का अपमान करना कभी नहीं था।

भाजपा के भीतर भी आलोचना: बैजयंत पांडा ने बताया ‘अशोभनीय’ और ‘अस्वीकार्य’

दिलचस्प बात यह है कि निशिकांत दुबे की इस टिप्पणी का विरोध न केवल विपक्ष ने किया, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर भी कड़ा स्वर उठा। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ओडिशा के कद्दावर नेता बैजयंत जय पांडा ने दुबे का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने बीजू पटनायक को ‘बीजू अंकल’ संबोधित करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति पर संदेह करना सरासर हास्यास्पद और अज्ञानतापूर्ण है। पांडा ने स्पष्ट किया कि बीजू बाबू आधुनिक भारत के महानतम देशभक्तों में से एक थे और उन पर इस तरह के हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।

ओडिशा विधानसभा में जबरदस्त हंगामा: निंदा प्रस्ताव की मांग

इस विवाद की गूँज ओडिशा विधानसभा के सत्र में भी सुनाई दी। मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बीजू जनता दल (BJD), कांग्रेस और सीपीएम के सदस्य एकजुट हो गए। विपक्षी दल भाजपा सांसद की टिप्पणी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग पर अड़ गए और सदन के बीचों-बीच (वेल) आकर नारेबाजी करने लगे। बीजेडी के वरिष्ठ नेता प्रसन्ना आचार्य और रानेंद्र प्रताप स्वैन ने इसे ओडिया अस्मिता और भावनाओं पर चोट बताया। विपक्षी विधायकों ने मांग की कि विधानसभा को आधिकारिक तौर पर इस अपमानजनक बयान की निंदा करनी चाहिए।

कांग्रेस का तीखा प्रहार: स्वतंत्रता सेनानियों की विश्वसनीयता पर सवाल क्यों?

कांग्रेस विधायक दल के नेता रामा चंद्र कदम ने इस विवाद में भाजपा की विचारधारा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग इतिहास में अंग्रेजों की सेवा कर रहे थे, वे आज जवाहरलाल नेहरू और बीजू पटनायक जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की साख पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने निशिकांत दुबे के बयान को ओडिया गौरव का अपमान बताते हुए पूरी भाजपा को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का संकल्प जताया, जिससे राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।

क्या था विवादित बयान? नेहरू और सीआईए से जोड़ा था नाम

इस पूरे विवाद की जड़ निशिकांत दुबे का 27 मार्च को दिया गया वह बयान था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन युद्ध के दौरान बीजू पटनायक तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। इस बयान के बाद ओडिशा में आक्रोश की लहर दौड़ गई। छात्रों और युवाओं ने राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए और भाजपा सांसद का पुतला फूँका। लोगों का मानना था कि एक कद्दावर नेता की ऐतिहासिक भूमिका को संदिग्ध रूप में पेश करना गलत है।

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