Nirav Modi case : लंदन कोर्ट का बड़ा फैसला, नीरव मोदी को बैंक का 100 करोड़ चुकाने का आदेश

लंदन हाई कोर्ट के एक बड़े फैसले ने नीरव मोदी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बैंक ऑफ इंडिया के करोड़ों रुपये के कर्ज मामले में अदालत ने ऐसा आदेश दिया है जिसने भारत से लेकर ब्रिटेन तक नई चर्चा छेड़ दी है। आखिर क्या है पूरा मामला और आगे क्या होगा?

Nirav Modi case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 24, 2026

Nirav Modi case :  भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन के हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। लंदन कमर्शियल कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को लगभग 100 करोड़ रुपये (10.7 मिलियन डॉलर) से अधिक का कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। अदालत में सुनवाई के दौरान जज साइमन टिंकलर ने स्पष्ट किया कि नीरव मोदी ने बैंक से लिए गए कर्ज के बदले व्यक्तिगत गारंटी (Personal Guarantee) दी थी, जिसके चलते अब वह इस पूरी राशि की अदायगी के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी है। इस फैसले को भारतीय बैंकों के लिए विदेशों में फंसे कर्ज की वसूली के मामले में एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

नीरव मोदी की दलीलें खारिज, नोटिस को माना वैध

अदालत के सामने नीरव मोदी की कानूनी टीम ने बैंक के दावों को चुनौती देने की कोशिश की थी। उनके वकीलों का तर्क था कि बैंक द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी लागू नहीं होती और कर्ज वापसी की मांग प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। साथ ही, नीरव मोदी ने यह दलील भी दी कि उसे अप्रैल 2018 और अक्टूबर 2025 में भेजे गए बैंक नोटिस नहीं मिले थे। हालांकि, जज साइमन टिंकलर ने इन सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि नोटिस उचित तरीके से तामील किए गए थे, जिसमें उस जेल का पता भी शामिल था जहाँ नीरव मोदी कैद है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2019 में नीरव मोदी द्वारा अपने वकीलों को नोटिस की प्रतियां सौंपे जाने के तथ्य ने यह साबित कर दिया कि उसे कर्ज वापसी की मांग की पूरी जानकारी थी।

आर्थिक संकट और कर्ज अदायगी का आधार

जज टिंकलर ने अपने फैसले में फरवरी 2018 की उस स्थिति का भी उल्लेख किया, जब नीरव मोदी और उसके फायरस्टार ग्रुप की आर्थिक स्थिति चरमरा गई थी। अदालत ने नीरव मोदी द्वारा बैंक को भेजे गए एक ईमेल का हवाला दिया, जिसमें उसने स्वीकार किया था कि मीडिया रिपोर्ट्स के कारण उसकी कंपनियों के कामकाज पर गंभीर प्रभाव पड़ा है और वे भुगतान करने में असमर्थ हैं। इस स्वीकारोक्ति को आधार बनाते हुए अदालत ने माना कि बैंक के पास कर्ज वापस मांगने का पूर्ण अधिकार था। यह पूरा मामला वर्ष 2012 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी ‘फायरस्टार डायमंड FZE’ को कर्ज प्रदान किया था।

बैंक ऑफ इंडिया के लिए बड़ी जीत

नीरव मोदी ने 3 अगस्त 2013 को इस कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी हस्ताक्षरित की थी, जिसमें यह स्पष्ट था कि कंपनी द्वारा भुगतान न करने की स्थिति में नीरव मोदी व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार होगा। वर्ष 2018 में पीएनबी घोटाले का मामला सामने आने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने अपने कर्ज की वसूली की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन तब कोई जवाब नहीं मिला था। नीरव मोदी फिलहाल लंदन की एक जेल में बंद है और भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। यह फैसला साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों पर भी आर्थिक अपराधियों की जवाबदेही तय की जा रही है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली के लिए एक बड़ी राहत है।

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