Nigeria Massacre: पश्चिमी नाइजीरिया के क्वारा राज्य से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ सशस्त्र उग्रवादियों ने दो गांवों—वोरो और नुकु—पर हमला कर कम से कम 162 लोगों की नृशंस हत्या कर दी है। बुधवार को स्थानीय कानून निर्माताओं ने इस नरसंहार की पुष्टि करते हुए इसे हाल के महीनों का सबसे घातक हमला करार दिया है। क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले संसद सदस्य मोहम्मद ओमार बियो के अनुसार, मंगलवार शाम को हुए इस हमले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। हमलावरों ने न केवल लोगों की जान ली, बल्कि गांवों में बड़े पैमाने पर लूटपाट और आगजनी भी की।
लकुरावा समूह पर हमले का शक: खौफ में ग्रामीण
संसद सदस्य बियो ने इस बर्बरता के लिए ‘लकुरावा’ नामक सशस्त्र समूह को जिम्मेदार ठहराया है, जिसे इस्लामिक स्टेट (IS) से संबद्ध माना जाता है। हमले के बाद की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे विचलित करने वाले हैं। जमीन पर खून से लथपथ लाशें बिखरी हुई हैं, जिनमें से कई के हाथ पीछे बंधे हुए थे, जो इस बात का संकेत है कि उन्हें मौत के घाट उतारने से पहले प्रताड़ित किया गया था। रेड क्रॉस के स्थानीय सचिव आयोडेजी इमैनुएल बाबाओमो ने बताया कि प्रभावित इलाके राज्य की राजधानी से लगभग आठ घंटे दूर और बेनिन सीमा के पास हैं, जिसके कारण राहत दल अभी तक वहां पहुंच नहीं पाए हैं।
सैन्य अभियान का बदला या उग्रवादियों की हताशा?
क्वारा राज्य के गवर्नर अब्दुलरहमान अब्दुलरजाक ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे उग्रवादियों की “कायरतापूर्ण और निराशाजनक अभिव्यक्ति” बताया है। गवर्नर का मानना है कि सेना द्वारा चलाए जा रहे निरंतर अभियानों से उग्रवादी बौखला गए हैं और अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। नाइजीरिया वर्तमान में एक बहुआयामी सुरक्षा संकट से जूझ रहा है, जहाँ एक तरफ पूर्वोत्तर में इस्लामी विद्रोह है, तो दूसरी तरफ उत्तर-मध्य और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में फिरौती के लिए अपहरण और हत्याओं का दौर जारी है।
बोको हरम और अन्य गुटों का बढ़ता प्रभाव
नाइजीरिया में हिंसा का यह चक्र नया नहीं है। पिछले हफ्ते ही बोको हरम के उग्रवादियों ने एक निर्माण स्थल और सैन्य बेस पर हमला कर 36 लोगों की हत्या कर दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि नाइजीरिया में सक्रिय ‘लकुरावा’ समूह की जड़ें पड़ोसी देश नाइजर में हैं, जो 2023 के तख्तापलट के बाद सीमावर्ती इलाकों में अधिक सक्रिय हो गया है। हडसन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता जेम्स बार्नेट के अनुसार, क्वारा राज्य का यह हमला ‘जेएएस’ (JAS) गुट द्वारा भी किया जा सकता है, जो बोको हरम का ही एक हिस्सा है और क्षेत्र में पहले भी नरसंहार कर चुका है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और अमेरिका का हस्तक्षेप
नाइजीरिया में ईसाइयों और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नाइजीरियाई सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि वह अपने नागरिकों, विशेषकर ईसाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाती है, तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है। इसी बीच, यूएस अफ्रीका कमांड ने सुरक्षा संकट से निपटने के लिए सैन्य अधिकारियों की एक छोटी टीम नाइजीरिया भेजी है। वाशिंगटन की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर है, क्योंकि नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और यहां की अस्थिरता पूरे महाद्वीप को प्रभावित कर सकती है।
न्याय और सुरक्षा की पुकार
इस नरसंहार ने नाइजीरियाई सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कात्सिना और क्वारा जैसे राज्यों में लगातार हो रही हत्याएं यह दर्शाती हैं कि उग्रवादियों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोग अब सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें इन ‘मौत के सौदागरों’ से निजात मिल सके। जब तक इन सशस्त्र समूहों की कमर नहीं तोड़ी जाती, तब तक नाइजीरिया के दूरदराज के इलाकों में शांति बहाल होना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
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