नए साल का जश्न प्रकृति के बीच: लोध फॉल में उमड़ी सैलानियों की भीड़, झरने का नजारा बना आकर्षण

रांची नववर्ष के पहले दिन झारखंड के लातेहार जिले में स्थित राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बना रहा। राजधानी रांची से लगभग 200 किलोमीटर और लातेहार जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर महुआडांड़ प्रखंड में स्थित इस प्राकृतिक धरोहर को देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचे। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है नए साल की शुरुआत प्रकृति के बीच करने की चाह में आए सैलानियों से पूरा क्षेत्र गुलजार नजर आया। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है, जहां बूढ़ा नदी का पानी लगभग 143 मीटर की

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Published On :

जनवरी 2, 2026

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रांची

नववर्ष के पहले दिन झारखंड के लातेहार जिले में स्थित राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बना रहा। राजधानी रांची से लगभग 200 किलोमीटर और लातेहार जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर महुआडांड़ प्रखंड में स्थित इस प्राकृतिक धरोहर को देखने के लिए हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचे।

लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है
नए साल की शुरुआत प्रकृति के बीच करने की चाह में आए सैलानियों से पूरा क्षेत्र गुलजार नजर आया। लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है, जहां बूढ़ा नदी का पानी लगभग 143 मीटर की ऊंचाई से सीधे धरती पर गिरता है। पहाड़ियों से घिरा यह जलप्रपात न केवल झारखंड बल्कि आसपास के राज्यों के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। नववर्ष के अवसर पर यहां पहुंचे पर्यटक जलप्रपात की ऊंचाई, कलकल करती जलधारा और चारों ओर फैली हरियाली को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आए। पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जलप्रपात के नीचे जहां पानी काफी गहरा है, वहां किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के लिए पानी में उतरने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी वन विभाग द्वारा गठित विकास समिति के माध्यम से की जाती है, क्योंकि यहां देश के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं।

नवंबर महीने से यहां पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है
घूमने आए सैलानियों ने बताया कि लोध फॉल की खूबसूरती मन को सुकून देने वाली है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी से तीन अलग-अलग दिशाओं में गिरती जलधाराएं इस स्थान की सुंदरता को और भी खास बना देती हैं। हालांकि कुछ पर्यटकों ने यह भी कहा कि यदि जलप्रपात के पास बने लकड़ी के पुल की मरम्मत कर दी जाए, तो भ्रमण का अनुभव और बेहतर हो सकता है। लोध फॉल झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के पर्यटकों के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल है। नवंबर महीने से यहां पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है, जो मार्च तक लगातार बनी रहती है। लोध फॉल तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रांची, पलामू, लातेहार या छत्तीसगढ़ से सड़क मार्ग द्वारा पहले महुआडांड़ पहुंचना होता है। इसके बाद महुआडांड़ से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित पाकिर्ंग स्थल तक वाहन ले जाया जा सकता है। वहां से लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर पर्यटक जलप्रपात तक पहुंचते हैं।

 

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