Netanyahu’s New Alliance: ‘ईरान को अकेले नहीं छोड़ेंगे’, नेतन्याहू ने किया नए शक्तिशाली गठबंधन का एलान

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पेसाच से पहले राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बड़े सैन्य गठबंधन की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु और मिसाइल खतरे को खत्म करने के लिए पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण देश अब इजरायल के साथ खड़े हैं। क्या यह गठबंधन ईरान में सत्ता परिवर्तन लाएगा?

Netanyahu’s New Alliance

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 1, 2026

Netanyahu’s New Alliance: ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के पटल पर एक नया धमाका किया है। नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि वे मध्य-पूर्व के कुछ महत्वपूर्ण और प्रभावशाली देशों के साथ मिलकर एक बेहद शक्तिशाली सैन्य और रणनीतिक गठबंधन (Strategic Alliance) तैयार कर रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से उन्होंने अभी तक उन सहयोगी देशों के नामों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके इस बयान ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही ईरान में अपना सैन्य ऑपरेशन समाप्त कर सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही अमेरिका पीछे हटे, लेकिन ईरान के शासन के खिलाफ उनका अभियान अभी अधूरा है और वे इसे अंजाम तक पहुँचाकर ही दम लेंगे।

ईरानी शासन की जड़ें हिलने का दावा: एक ट्रिलियन डॉलर की बर्बादी का हिसाब

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मंगलवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए दावा किया कि इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों ने अयातुल्ला शासन की नींव को हिलाकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले कई दशकों में इजरायल को नक्शे से मिटाने के लिए लगभग एक ट्रिलियन डॉलर (करीब 83 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए थे, जो अब इजरायली हमलों के कारण पूरी तरह मिट्टी में मिल चुके हैं। नेतन्याहू के मुताबिक, ईरान का विवादित परमाणु कार्यक्रम और उसकी खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता अब भारी दबाव में है। इजरायली नेतृत्व को पूरा भरोसा है कि यह शासन देर-सवेर ढह जाएगा और नया क्षेत्रीय गठबंधन इस प्रक्रिया को और तेज करेगा। यह बयान अरब देशों के साथ इजरायल के बदलते समीकरणों की ओर भी एक बड़ा इशारा है।

ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ रुख: दो हफ्तों में सैन्य वापसी और तेल की कीमतों पर नजर

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नजरिया नेतन्याहू से काफी अलग और पूरी तरह अमेरिका केंद्रित दिखाई दे रहा है। जब ट्रंप से बढ़ती तेल की कीमतों के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक कहा कि वे बहुत जल्द ईरान से अपनी सेना बाहर निकाल लेंगे, जिससे वैश्विक बाजार में ईंधन के दाम धड़ाम से नीचे गिर जाएंगे। ट्रंप का मानना है कि इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए अब सिर्फ दो हफ्ते या कुछ दिनों का समय ही शेष है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका का यह फैसला ईरान के साथ किसी नई ‘डील’ पर निर्भर नहीं है। ट्रंप के इस रुख से संकेत मिलता है कि वे अब इस युद्ध को और लंबा खींचने के बजाय घरेलू आर्थिक मुद्दों और महंगाई पर ध्यान देना चाहते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा से पीछे हटेगा अमेरिका: दुनिया को ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अब दुनिया के अन्य देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर फ्रांस, चीन या किसी अन्य देश को खाड़ी से तेल और गैस चाहिए, तो उन्हें खुद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपने जंगी जहाज भेजने होंगे। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका अब दूसरे देशों के जहाजों की मुफ्त पहरेदारी करने का कोई कारण नहीं देखता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चीन जैसे देशों को अपने ‘सुंदर जहाजों’ में ईंधन भरने के लिए खुद वहां जाना चाहिए। अमेरिका की यह नई नीति वैश्विक समुद्री सुरक्षा के पूरे समीकरण को बदल सकती है, जिससे उन देशों की चिंता बढ़ गई है जो अब तक खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर थे।

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