Netaji Jayanti 2026: नेताजी जयंती पर ममता का बड़ा धमाका, SIR को बताया ‘चोर दरवाजा’, नागरिकता पर केंद्र को ललकारा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। SIR (एसआईआर) प्रक्रिया को 'NRC का पिछला दरवाजा' करार देते हुए उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या बंगाल में नागरिकता का नया संकट खड़ा होने वाला है? जानिए पूरी सच्चाई।

Netaji Jayanti 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 23, 2026

Netaji Jayanti 2026: 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पूरे राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों में मनाई गई। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के रेड रोड स्थित सुभाष मेमोरियल स्टेज पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं कार्यक्रम में मौजूद रहीं और उन्होंने नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान उन्होंने नेताजी के जीवन, संघर्ष और आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान को याद करते हुए कई राजनीतिक और ऐतिहासिक मुद्दों पर अपनी बात रखी।

नेताजी से जुड़े रहस्यों पर फिर उठे सवाल

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंच से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलों और उनके रहस्यमय गायब होने का मुद्दा एक बार फिर उठाया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी नेताजी के लापता होने के रहस्य का स्पष्ट अंत क्यों नहीं हो सका है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को नेताजी की जन्मतिथि तो पता है, लेकिन उनकी मृत्यु की तारीख आज भी अनिश्चित बनी हुई है। ममता ने यह सवाल भी उठाया कि नेताजी के जन्मदिन को अब तक राष्ट्रीय अवकाश घोषित क्यों नहीं किया गया।

SIR को लेकर केंद्र और आयोग पर निशाना

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि अगर नेताजी आज जीवित होते, तो क्या उनसे भी नागरिकता का प्रमाण मांगा जाता। ममता ने कहा कि क्या उन्हें भी सुनवाई के लिए बुलाकर यह पूछा जाता कि वे भारतीय हैं या नहीं। उनके इस बयान को SIR प्रक्रिया के खिलाफ कड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

चंद्र बोस को बुलाने पर जताई नाराज़गी

मुख्यमंत्री ने नेताजी के परपोते चंद्र बोस को SIR से जुड़ी सुनवाई में बुलाए जाने पर भी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नेताजी के परिवार के सदस्य को इस तरह की प्रक्रिया में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ममता ने इसे इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का अपमान बताया और कहा कि इससे आम लोगों में गलत संदेश जा रहा है।

आंकड़ों के ज़रिये उठाए गंभीर सवाल

ममता बनर्जी ने SIR से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल में लगभग 1.38 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले ही करीब 58 लाख नाम एकतरफा तरीके से सूची से हटा दिए गए थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ लोग इस प्रक्रिया से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर 7 करोड़ मतदाताओं में से 2 करोड़ को बाहर कर दिया जाए, तो लोकतंत्र का क्या हाल होगा।

तृणमूल के आरोप और आयोग को पत्र

तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश रची जा रही है। पार्टी का कहना है कि सुनवाई के नाम पर बुजुर्गों और बीमार लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कई पत्र लिखकर समाधान की मांग भी की है। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार आम लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी।

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