Sudan Gurung Resignation : नेपाल में सियासी भूचाल, गृहमंत्री सुधन गुरुंग का इस्तीफा, वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में होगी बड़ी जांच

काठमांडू से बड़ी खबर! भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का दावा करने वाली बालेन शाह सरकार को लगा सबसे बड़ा झटका। गृहमंत्री सुधन गुरुंग ने भारी दबाव के बीच क्यों छोड़ा पद? क्या दीपक भट्टा के साथ उनके कनेक्शन और करोड़ों के शेयर निवेश ने फंसाया पेच? जानें इस इस्तीफे की पूरी इनसाइड स्टोरी!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 22, 2026

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Sudan Gurung Resignation : हिमालयी देश नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। नवनियुक्त गृहमंत्री सुधन गुरुंग ने अपने पद की शपथ लेने के मात्र 26 दिनों के भीतर ही कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को सामने आए इस घटनाक्रम ने पूरी सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। गुरुंग का यह फैसला उनकी वित्तीय संपत्तियों और संदिग्ध निवेशों को लेकर उठाई गई चिंताओं के बीच आया है। राजनीतिक गलियारों में इतनी जल्दी किसी बड़े मंत्री का पद छोड़ना नेपाल के वर्तमान सत्ता समीकरणों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सुधन गुरुंग ने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को इस निर्णय की जानकारी दी।

विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ संबंधों पर घिरे पूर्व गृहमंत्री

सुधन गुरुंग के खिलाफ लगे आरोपों की जड़ें विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा से जुड़ी हुई हैं। उन पर आरोप है कि उनकी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक हिस्सेदारी रही है और उन्होंने माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध तरीके से निवेश किया है। गौरतलब है कि दीपक भट्टा स्वयं मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं और वर्तमान में उनके खिलाफ कानूनी जांच प्रक्रिया जारी है। एक ऐसे व्यक्ति के साथ व्यापारिक संबंध होना, जो देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की रडार पर हो, गुरुंग के लिए कूटनीतिक और नैतिक रूप से भारी पड़ गया। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए गुरुंग की नैतिकता पर सवाल खड़े किए थे।

भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान से निजी आलोचनाओं तक का सफर

रोचक बात यह है कि सुधन गुरुंग ने जब गृहमंत्री का पद संभाला था, तब उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से पारदर्शी शासन और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने के वादे किए थे। हालांकि, नियति का क्रूर मजाक देखिए कि भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प लेने वाले मंत्री को स्वयं अपने निजी निवेशों और वित्तीय अनियमितताओं के चलते कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। नागरिक समाज और विपक्षी गठबंधन द्वारा किए गए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद गुरुंग के पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

फेसबुक पोस्ट के जरिए स्पष्टीकरण: हितों के टकराव से बचने की कोशिश

अपने इस्तीफे की घोषणा करने के लिए सुधन गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट का सहारा लिया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मुझसे जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और संवैधानिक पद पर रहते हुए हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति से बचने के लिए मैंने यह कदम उठाया है। मैं नहीं चाहता कि जांच प्रक्रिया पर मेरे पद का किसी भी तरह का प्रभाव पड़े।” गुरुंग ने तर्क दिया कि एक जिम्मेदार राजनेता के तौर पर वह जांच में पूर्ण सहयोग करना चाहते हैं और नैतिकता के आधार पर पद त्याग रहे हैं।

भविष्य की राह और नेपाल सरकार के सामने कड़ी चुनौती

सुधन गुरुंग के इस्तीफे ने नेपाल की प्रधानमंत्री नीत सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गृह मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। साथ ही, गुरुंग के खिलाफ शुरू होने वाली जांच की निष्पक्षता पर भी सबकी नजरें टिकी होंगी। नेपाल की जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई परीक्षा के रूप में देख रहे हैं। क्या यह इस्तीफा वास्तव में नैतिकता का परिचायक है या केवल राजनीतिक दबाव का परिणाम, यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल, 22 अप्रैल की यह तारीख नेपाल के संसदीय इतिहास में एक संक्षिप्त लेकिन विवादित कार्यकाल के रूप में दर्ज हो गई है।

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