Nepal Flood: नेपाल की बाढ़ से मचा हड़कंप, बिहार-UP के इन इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी

नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। त्रिशूली और गंडक नदी के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए निगरानी तेज की गई है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए हैं। सीमावर्ती जिलों में NDRF-SDRF की टीमें तैनात हैं।

Nepal Flood

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 28, 2026

Nepal Flood: नेपाल के हिमालयी इलाकों में भारी बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल में बाढ़ का असर केवल वहीं तक सीमित नहीं रहता, क्योंकि वहां से निकलने वाली कई नदियां भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। त्रिशूली नदी आगे चलकर नारायणी-गंडक नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है। ऐसे में नेपाल में अचानक बढ़ा जलप्रवाह भारत में गंडक नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है।

त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने से गंडक पर दबाव

बताते चले कि, केंद्रीय जल आयोग की ओर से त्रिशूली नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इसके बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे जिलों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों की नजर नदियों के जलस्तर, बैराजों और तटबंधों पर बनी हुई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कदम उठाया जा सके।

बिहार-UP के लिए गंडक नदी बनी बड़ी चिंता

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, नेपाल से निकलने वाली गंडक नदी इस समय बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए प्रमुख चिंता का कारण बनी हुई है। नेपाल में लगातार बारिश के चलते गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा कोसी, बागमती, कमला, घाघरा और राप्ती जैसी नदियां भी नेपाल और हिमालयी क्षेत्र से निकलकर भारत के सीमावर्ती इलाकों को प्रभावित करती हैं।

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट से बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनदी झील के अचानक फटने का संभावित खतरा भी स्थिति को संवेदनशील बना रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी हिमनदी झील से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे आने पर नदियों का प्रवाह तेजी से बढ़ सकता है। इससे नदी तंत्र, पुल, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए

बढ़ते जलप्रवाह को नियंत्रित करने और नदी प्रणाली पर दबाव कम करने के लिए बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। गंडक नदी के पानी के प्रबंधन में यह बैराज महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अधिकारियों की कोशिश है कि बढ़े हुए प्रवाह को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जाए और निचले इलाकों में खतरा कम किया जा सके।

नेपाल की दूसरी नदियों से भी UP-बिहार में बाढ़ का खतरा

गंडक अकेली ऐसी नदी नहीं है, जिसका नेपाल में होने वाली बारिश और बाढ़ का असर भारत पर पड़ता है। कोसी बिहार में बाढ़ की बड़ी वजहों में शामिल रही है। बागमती और कमला भी नेपाल से निकलकर बिहार के मैदानी इलाकों में पहुंचती हैं। वहीं घाघरा हिमालयी क्षेत्र से निकलती है और नेपाल की करनाली नदी प्रणाली से जुड़ी है।

राप्ती नदी से उत्तर प्रदेश में बढ़ सकती है परेशानी

राप्ती नदी उत्तर प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण है। मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश होने पर इसका जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। नेपाल से निकलने वाली ये नदियां मिलकर एक बड़ा जल निकासी तंत्र बनाती हैं। यही वजह है कि नेपाल में होने वाली भारी बारिश, भूस्खलन या अचानक जलप्रवाह बढ़ने का असर भारतीय इलाकों में भी देखने को मिल सकता है।

बिहार के 9 और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में अलर्ट

केंद्रीय जल आयोग और आपदा प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार के 9 और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई है। बिहार में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी समेत संवेदनशील इलाकों पर निगरानी रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में महाराजगंज और कुशीनगर समेत नेपाल सीमा से जुड़े जिलों को भी अलर्ट पर रखा गया है।

फिलहाल तत्काल बड़े बाढ़ संकट का खतरा कम

नेपाल से बड़ी मात्रा में पानी आने के बावजूद स्थिति में फिलहाल कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर जलस्तर कम होना शुरू हुआ है। पानी भारतीय सीमा की ओर बढ़ने और बैराजों से गुजरने के कारण तत्काल व्यापक बाढ़ का खतरा कुछ कम हुआ है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नेपाल में दोबारा भारी बारिश या अचानक अपस्ट्रीम जलप्रवाह बढ़ने से हालात तेजी से बदल सकते हैं।

नेपाल बाढ़ को लेकर प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पहले से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। निचले इलाकों और नदी किनारे स्थित बस्तियों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। इसके साथ ही तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।

हिमालयी नदियों पर लगातार नजर

हिमालय से निकलने वाली नदियां बारिश, भूस्खलन और हिमनदी घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया करती हैं। इसलिए नेपाल में बारिश की स्थिति पर भारत की भी लगातार नजर बनी हुई है। प्रशासन का फोकस फिलहाल नदियों के जलस्तर, बैराजों और तटबंधों की निगरानी के साथ संवेदनशील इलाकों में लोगों की सुरक्षा पर है। आने वाले दिनों में नेपाल में बारिश की स्थिति ही तय करेगी कि बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा कितना बढ़ता है।