Nepal Flood: पड़ोसी देश नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। फ्लैश फ्लड के चलते कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने एक बार फिर नेपाल के साथ अपनी दोस्ती और एकजुटता का संदेश दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास पहुंचकर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और नेपाल को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
राजनाथ सिंह ने नेपाली दूतावास में जताया गहरा दुख
बताते चले कि, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नेपाली दूतावास में रखी शोक पुस्तिका में अपना संदेश दर्ज किया। उन्होंने भारत सरकार और देश की जनता की ओर से नेपाल में हुई भारी जनहानि और विनाश पर गहरा दुख व्यक्त किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों को प्रभावित किया है, बल्कि कई विदेशी नागरिक भी इसकी चपेट में आए हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना
शोक संदेश में रक्षा मंत्री ने उन परिवारों के प्रति संवेदना जताई, जिन्होंने इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में अपने प्रियजनों को खो दिया। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में साफ किया कि भारत इस कठिन समय में नेपाल को अकेला नहीं छोड़ेगा और राहत, बचाव तथा पुनर्वास के प्रयासों में हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत-नेपाल संबंधों पर राजनाथ सिंह का बड़ा संदेश
राजनाथ सिंह ने भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल का करीबी दोस्त, साझेदार और सुख-दुख का साथी रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के दौरान भी भारत अपने नेपाली भाइयों और बहनों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने खोज एवं बचाव अभियान से लेकर पुनर्वास तक नेपाल के प्रयासों में सहयोग का भरोसा दिया।
नेपाल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड से हालात बेहद गंभीर
नेपाल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। वहीं करीब 4,247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
चितवन में नेपाल बाढ़ से सबसे ज्यादा तबाही
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में चितवन सबसे ऊपर है, जहां 272 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 207, नवलपरासी पश्चिम में 151, नुवाकोट में 95, गोरखा में 62, धाडिंग में 55, तनहुं में 37 और रसुवा में 24 लोगों की जान गई है। कई इलाकों में लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
नेपाल बाढ़ में सुरक्षाबलों के कर्मचारी भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा में आम नागरिकों के साथ-साथ नेपाल पुलिस, नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, सीमा शुल्क और आव्रजन कार्यालय के कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं। रसुवा और नुवाकोट से सबसे ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। ऐसे में राहत एजेंसियों के सामने प्रभावित इलाकों तक पहुंचना और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नेपाली सेना ने तीन भारतीय नागरिकों को किया रेस्क्यू
इस बीच नेपाल से भारतीय नागरिकों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। नेपाल के रसुवा जिले के बाढ़ प्रभावित चिलिमे गांव से नेपाली सेना ने तीन भारतीय नागरिकों और उनके एक नेपाली सहयोगी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए इसकी जानकारी साझा की।
भारत कर रहा भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की तैयारी
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रेस्क्यू किए गए भारतीय नागरिकों से मुलाकात भी की और उनकी सुरक्षित निकासी के लिए नेपाली सेना का आभार जताया। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास इन सभी लोगों की भारत वापसी की व्यवस्था कर रहा है। नेपाल में जारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच यह रेस्क्यू ऑपरेशन भारत और नेपाल के बीच सहयोग की एक और मिसाल बनकर सामने आया है।
संकट की घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा भारत
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से पैदा हुए इस गंभीर संकट के बीच भारत का संदेश साफ है—मुश्किल वक्त में दोनों पड़ोसी देश एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। राजनाथ सिंह का नेपाली दूतावास पहुंचना और भारत की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा देना दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है। वहीं नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश के साथ प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने की कोशिशें तेज की जा रही हैं।










