Nepal Earthquake Alert: भारत के पड़ोसी देश नेपाल में शुक्रवार की सुबह प्रकृति के रौद्र रूप ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। जब अधिकांश लोग मीठी नींद सो रहे थे, तभी अचानक धरती के तेज कंपन ने उन्हें बिस्तरों से उठने पर मजबूर कर दिया। रिक्टर स्केल पर 4.7 की तीव्रता वाले इस भूकंप ने पूर्वी नेपाल के कई जिलों में भारी दहशत पैदा कर दी है। झटके महसूस होते ही लोग कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना अपने घरों से बाहर निकलकर खुले आसमान के नीचे आ गए। नेपाल में आए इस शक्तिशाली भूकंप के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत टीमें पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का बारीकी से जायजा लिया जा सके।
टोपके गोला बना केंद्र: काठमांडू से 400 किमी दूर था केंद्र बिंदु
राष्ट्रीय भूकंप निगरानी और अनुसंधान केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का यह तेज झटका शुक्रवार तड़के 3 बजकर 18 मिनट पर दर्ज किया गया। भूकंप का मुख्य केंद्र (Epicenter) राजधानी काठमांडू से लगभग 400 किलोमीटर पूर्व में स्थित संखुवासभा और ताप्लेजंग की सीमा के पास ‘टोपके गोला’ नामक दुर्गम स्थान पर था। यह केंद्र जमीन के काफी गहराई में स्थित था, जिसके कारण झटके का प्रभाव एक बड़े दायरे में महसूस किया गया। अचानक आए इस प्राकृतिक झटके ने लोगों को वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप की याद दिला दी, जिससे भय का माहौल और गहरा गया।
पूर्वी नेपाल के कई जिलों में अफरा-तफरी का माहौल
इस भूकंप का प्रभाव केवल केंद्र तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि संखुवासभा जिले के साथ-साथ भोजपुर, पंचथर, तेहरथुम और ताप्लेजंग जैसे पूर्वी नेपाल के अन्य हिस्सों में भी जबरदस्त कंपन महसूस किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कंपन इतना तीव्र था कि घरों की खिड़कियां बजने लगीं और रसोई में रखे बर्तन नीचे गिरने लगे। डरे हुए लोग काफी देर तक अपने घरों के बाहर जमा रहे और एक-दूसरे की खैरियत पूछते नजर आए। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या बड़ी इमारतों के गिरने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जो एक बड़ी राहत की बात है।
सिक्किम में भी 24 घंटे में दो बार मची हलचल
नेपाल की इस हलचल का असर भारतीय सीमा तक भी पहुंचा। भारत के पर्वतीय राज्य सिक्किम में पिछले 24 घंटों के भीतर दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। पहला झटका गुरुवार सुबह 11 बजकर 24 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। इसका केंद्र ग्यालशिंग जिले के युक्सोम से उत्तर-पूर्व की ओर था। इसके ठीक कुछ देर बाद, दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर मांगन जिले में 3.5 तीव्रता का दूसरा झटका आया। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग इन लगातार हो रहे कंपनों से बेहद डरे हुए हैं और सावधानी बरत रहे हैं।
हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक हलचल: विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी
भू-वैज्ञानिकों और भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी बेल्ट में लगातार आ रहे ये झटके टेक्टोनिक प्लेटों के भीतर होने वाली आंतरिक उथल-पुथल का सीधा परिणाम हैं। यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील ‘जोन 5’ में आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे ये झटके भविष्य में आने वाले किसी बड़े खतरे की चेतावनी भी हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने पहाड़ी ढलानों और जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने और आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बल भी स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं।









