NEET UG 2026 Paper Leak: 2015 की तरह क्या फिर दोहराया जाएगा इतिहास? सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

3 मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद कर दिया गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने इसे एनटीए की 'प्रणालीगत विफलता' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 22 लाख परीक्षार्थी अब दोबारा परीक्षा की तारीख और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

NEET UG 2026 Paper Leak

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 13, 2026

NEET UG 2026 Paper Leak: भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 (NEET UG Exam) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा को पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है। इस घटनाक्रम ने देशभर के 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने इस पूरे मामले को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की प्रणालीगत विफलता बताते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। एसोसिएशन की मांग है कि अब भविष्य की परीक्षाएं न्यायिक निगरानी (Judicial Supervision) के तहत कराई जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल

बताते चले कि, नीट परीक्षा के आयोजन में आई इस बड़ी बाधा के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। FAIMA ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि परीक्षा का लीक होना महज एक घटना नहीं, बल्कि एजेंसी की सुरक्षा व्यवस्था का सिस्टेमैटिक फेलियर (Systemic Failure) है। 22 लाख उम्मीदवारों की मेहनत दांव पर लगी है, लेकिन एनटीए ने अब तक री-एग्जामिनेशन (Re-exam Schedule) की तारीखों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की है। चिकित्सा बिरादरी और छात्र संगठन अब एक ऐसी स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं जो एनटीए के प्रभाव से मुक्त हो।

पेपर लीक का इतिहास

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, यह पहली बार नहीं है जब मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट (Medical Entrance Test) में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। साल 2024 में भी सोशल मीडिया पर पेपर लीक के दावों ने तूल पकड़ा था। हालांकि उस समय एनटीए ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन बिहार के पटना में पुलिस ने चार परीक्षार्थियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि लाखों रुपये की रिश्वत और धांधली (Bribery and Malpractice) के बदले प्रश्न पत्र पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे। 2024 का यह मामला भी शीर्ष अदालत तक पहुंचा था, जहाँ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बावजूद कोर्ट ने बड़े पैमाने पर विफलता के सबूतों की कमी के कारण दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दिया था।

AIPMT से NEET तक का सफर

भारत में चिकित्सा शिक्षा के लिए एकीकृत प्रवेश परीक्षा (Centralized Entrance Exam) की शुरुआत 5 मई 2013 को हुई थी। इससे पहले, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) का आयोजन किया जाता था। साल 2019 में इस जिम्मेदारी को एनटीए को सौंप दिया गया। नीट की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य छात्रों को विभिन्न राज्य-स्तरीय परीक्षाओं के बोझ से बचाना और पूरे देश में एक समान पारदर्शी चयन प्रक्रिया (Transparent Selection Process) लागू करना था। भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) और सरकार ने इसे परीक्षाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना था।

2015 का एआईपीएमटी घोटाला और इलेक्ट्रॉनिक आंसर-की लीक

मेडिकल परीक्षाओं के इतिहास में साल 2015 एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जब AIPMT पेपर लीक (AIPMT Paper Leak) के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी थी। उस समय 15-20 लाख रुपये के बदले 90 उत्तरों वाली इलेक्ट्रॉनिक आंसर-की (Electronic Answer-key) लीक करने का मामला सामने आया था। इस घोटाले में कई डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की गिरफ्तारी हुई थी। इसी ऐतिहासिक घटना के बाद परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए एआईपीएमटी को पूरी तरह से समाप्त कर नीट (NEET) के रूप में नई व्यवस्था लागू की गई थी।

वर्तमान में नीट यूजी 2026 के रद्द होने से छात्रों में भारी रोष है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Supreme Court Verdict) पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल परीक्षा की गरिमा को कैसे बहाल किया जाए।