NEET Student Suicide: “मम्मी-पापा बात नहीं करते…” नीट के सपनों के साथ टूट गई श्रुति की उम्मीदें

नीट पेपर लीक के सदमे ने पटना में एक और होनहार छात्रा की जान ले ली। समस्तीपुर की रहने वाली श्रुति कुमारी ने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली।

NEET Student Suicide

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 2, 2026

NEET Student Suicide: नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के मामलों ने न केवल मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, बल्कि कई परिवारों के लिए एक कभी न भरने वाला घाव भी छोड़ दिया है। वर्षों की कठिन मेहनत और दिन-रात के संघर्ष के बाद जब छात्रों को सफलता का इंतजार था, तो पेपर लीक की खबरों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसी हताशा और अवसाद के बीच, समस्तीपुर की रहने वाली श्रुति कुमारी का नाम उन छात्रों की सूची में जुड़ गया है, जिन्होंने अपनी जान देकर विरोध और पीड़ा दर्ज की है। पटना के पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के सचिवालय कॉलोनी स्थित ‘राधे कृष्ण हॉस्टल’ के एक कमरे में मंगलवार, 2 जून को श्रुति का शव फंदे से लटकता मिला।

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खामोशी और अकेलेपन ने ली जान

श्रुति साल 2024 से इसी हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। छात्रावास के साथियों के अनुसार, वह स्वभाव से शांत थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बेहद परेशान दिख रही थी। घटना के दिन सुबह जब काफी देर तक उसने दरवाजा नहीं खोला, तो हॉस्टल के अन्य छात्रों को अनहोनी का संदेह हुआ। फॉरेंसिक टीम और पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। सबसे दुखद पहलू यह है कि श्रुति अक्सर अपनी सहेलियों से कहती थी कि उसके मम्मी-पापा उससे बात नहीं करते हैं। 10 दिन पहले ही गांव से लौटी श्रुति का यह अकेलापन उसके मानसिक तनाव को और बढ़ा गया, जो अंततः इस खौफनाक कदम का कारण बना।

सपनों का बोझ और व्यवस्था की मार

श्रुति अकेली ऐसी छात्रा नहीं है जिसे पेपर लीक के सदमे ने मौत की ओर धकेला है। इससे पहले मध्य प्रदेश के मऊगंज की आकांक्षा चतुर्वेदी ने भी इसी प्रकार अपना जीवन समाप्त कर लिया था। आकांक्षा के पिता ने बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर 15 लाख का कर्ज लिया था। पेपर लीक के बाद वह गहरे सदमे में थी और उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। अपने सुसाइड नोट में उसने स्पष्ट लिखा था कि वह अपने माता-पिता के सपनों के बोझ और उनकी उम्मीदों को पूरा न कर पाने के डर को सहन नहीं कर पाई।

छात्रों के भविष्य पर संकट और सिस्टम की जवाबदेही

नीट पेपर लीक का मुद्दा आज न केवल शैक्षणिक संस्थानों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एक तरफ जहां छात्र अपनी पूरी जवानी किताबों और कोचिंग सेंटरों के बीच बिता देते हैं, वहीं दूसरी तरफ पेपर लीक जैसी घटनाएं उन्हें मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। परीक्षा के पुनः आयोजन की अनिश्चितता और परिवार की आर्थिक स्थिति का दबाव छात्रों पर इतना अधिक होता है कि वे आत्महत्या जैसा चरम कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। श्रुति और आकांक्षा जैसी होनहार बेटियों की मौत व्यवस्था के माथे पर एक गहरा कलंक है, जो यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी व्यवस्था इन बच्चों की जान और उनके सपनों की रक्षा करने में सक्षम है?

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