NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक पर भड़कीं महुआ मोइत्रा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तंज कसते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा लिखना नहीं आता, आरएसएस सिर्फ मर्सी पिटीशन सिखाता है।

NEET Paper Leak

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 21, 2026

NEET Paper Leak: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के प्रश्नपत्र लीक होने के गंभीर मामले को लेकर देश भर के परीक्षार्थियों और युवा संगठनों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। परीक्षा संचालन प्रक्रिया में हुई व्यापक प्रशासनिक अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की सीधी जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इस राष्ट्रीय मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों और उनके परिजनों का सीधा आरोप है कि देश के लाखों होनहार मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ जो खौफनाक खिलवाड़ हुआ है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए विभागीय मंत्री को तत्काल प्रभाव से अपना पद छोड़ देना चाहिए।

‘चलो संसद’ मार्च के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने आंदोलनकारियों पर भांजी लाठियां

बताते चले कि, इसी कड़े संकल्प और विरोध के तहत 20 जुलाई को हजारों की संख्या में उग्र प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर एक विशाल और शांतिपूर्ण ‘चलो संसद’ मार्च निकालने का प्रयास किया। जैसे ही आंदोलनकारी युवाओं का हुजूम संसद मार्ग के नजदीक पहुंचा, वैसे ही वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते हालात अत्यंत तनावपूर्ण हो गए और लुटियंस दिल्ली रणक्षेत्र में तब्दील हो गई।

पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लोहे के सुरक्षा बैरिकेड्स खड़े कर रखे थे, जिन्हें लांघने का प्रयास करने पर सुरक्षा बलों ने निर्दयतापूर्वक लाठीचार्ज (Police Lathi Charge on Students) कर दिया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे। इस कार्रवाई में कई छात्र-छात्राओं के चोटिल होने की खबर है, जिसके बाद सरकार के खिलाफ आम जनता और विपक्ष का गुस्सा और अधिक भड़क गया है।

विपक्ष का तीखा राजनीतिक हमला

संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए इस बर्बर पुलिसिया लाठीचार्ज के बाद विपक्ष के तेवर केंद्र सरकार के प्रति बेहद आक्रामक हो गए हैं। इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीधे निशाने पर लेते हुए एक बेहद तीखा और विवादित बयान जारी किया है। महुआ मोइत्रा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट साझा करते हुए केंद्र की सत्तारूढ़ व्यवस्था पर तंज कसा।

“शायद हमारे माननीय शिक्षा मंत्री को आधिकारिक तौर पर इस्तीफा लिखना ही नहीं आता है। वैसे भी, आरएसएस (RSS) अपने स्वयंसेवकों को केवल मर्सी पिटीशन (दया याचिका) लिखना ही सिखाता है, नैतिक जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ना नहीं।” – महुआ मोइत्रा, सांसद (TMC)

महुआ मोइत्रा के इस आक्रामक बयान ने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है, जिसने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।

विपक्षी दलों ने बनाई सरकार को घेरने की मजबूत रणनीति

एनटीए (NTA) और नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak Controversy) के इस गंभीर विवाद की तपिश अब संसद के भीतर भी साफ तौर पर महसूस की जा रही है। देश के प्रमुख विपक्षी दल इस राष्ट्रीय सुरक्षा और युवा हितों से जुड़े मामले को लेकर लगातार केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की प्रशासनिक नाकामी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। यद्यपि सरकार और गृह मंत्रालय की ओर से लगातार यह दलील दी जा रही है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जा रही है, परंतु विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है।

संसद के वर्तमान मानसून सत्र (Monsoon Session of Parliament) के उद्घाटन के साथ ही दोनों सदनों में इस मुद्दे पर भारी हंगामा और विधायी व्यवधान देखने को मिल रहा है। विपक्षी गठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जब तक छात्रों के व्यापक हितों को लेकर सरकार की जवाबदेही तय नहीं करवा लेते, तब तक वे संसद के भीतर अपना विरोध और विधायी घेराबंदी जारी रखेंगे।