NEET Paper Leak: देश में नीट परीक्षा (NEET Exam Scam) और निरंतर हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस राष्ट्रव्यापी मुद्दे पर राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। समाचार एजेंसी के साथ बातचीत के दौरान कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री के हालिया बयानों पर तंज कसते हुए पूछा कि अगर देश का युवा वाकई सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है, तो फिर उनके भविष्य और सुरक्षा के बारे में पहले क्यों नहीं सोचा गया? उन्होंने सरकार की नीतियों को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पीएम मोदी की चुप्पी पर दागे तीखे सवाल
बताते चले कि, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित संवेदनशीलता को ढोंग बताते हुए कहा कि जब देश के कोने-कोने में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा था और एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे थे, तब देश के प्रधानमंत्री पूरी तरह मौन धारण किए हुए थे। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में याद दिलाया कि पीड़ित छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर 23 दिनों से भी अधिक समय तक दिल्ली की सड़कों पर आमरण अनशन पर बैठे रहे, धूप और विपरीत हालातों में संघर्ष करते रहे, लेकिन उस पूरे दौर में प्रधानमंत्री मोदी को देश के इन होनहार बच्चों की सुध लेने और उनका ख्याल रखने की फुर्सत नहीं मिली।
करोड़ों की वसूली का सनसनीखेज आरोप
आपको बता दे कि, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA Row) की कार्यप्रणाली और कथित वित्तीय शोषण को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सांख्यिकीय आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले साल नीट की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए देश के लगभग 23 लाख लाचार बच्चों को 3000-3000 रुपये की भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ी थी। इस प्रक्रिया के जरिए एनटीए ने छात्रों की जेब से लगभग 600 करोड़ रुपये की मोटी कमाई की। सिब्बल ने तंज कसा कि इस भारी-भरकम आर्थिक वसूली पर तो सरकार की नजर कभी नहीं गई, और जब धांधली के बाद पुरानी फीस को वापस (Refund) करने का वादा किया गया, तो आज तक एक भी बच्चे की फीस लौटाई नहीं गई। ऐसे में सरकार का छात्रों के हित की बात करना पूरी तरह बेमानी है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और नेताओं पर साधा निशाना
कपिल सिब्बल ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान देश की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी कड़े प्रहार किए। उन्होंने सीधे तौर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के बजाय सिर्फ अपनी कुर्सी पर बैठकर राजनीतिक नारे लगाने में व्यस्त हैं। सिब्बल ने प्रधानमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि अगर वे वाकई परीक्षा घोटालों को लेकर चिंतित हैं, तो परीक्षा माफिया से पहले अपनी ही सरकार के उन मंत्रियों और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) के जरिए मुकदमा चलाएं जो इन विभागों को संभाल रहे हैं, तब जाकर देश की जनता को उनकी नीयत पर भरोसा होगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि संसद के भीतर जारी मौजूदा गतिरोध और हंगामे के लिए पूरी तरह से सरकार और उसका अड़ियल रवैया ही जिम्मेदार है।
शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा
भाषण के अंतिम चरण में राज्यसभा सांसद ने भाजपा सरकार के वैचारिक एजेंडे को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से इस सरकार के पास देश के विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं है, बल्कि इनका एकमात्र और वास्तविक एजेंडा केवल देश में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीति करना रह गया है। कपिल सिब्बल ने देश की जनता से पूछा कि क्या 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने कभी भी देश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की बात की है? क्या देश की संसद के भीतर कभी शिक्षा, रोजगार या यूनिवर्सिटीज के गिरते स्तर को लेकर कोई सार्थक बहस हुई है? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजनीतिक एजेंडों से ऊपर उठकर देश के करोड़ों युवाओं और राष्ट्र के वास्तविक भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचने की पुरजोर अपील की।










