NEET Paper Leak : नीट पेपर लीक पर जयराम रमेश का बड़ा बयान, सरकार से पूछे यह सवाल

नीट परीक्षा पर महा-संग्राम: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एनटीए महानिदेशक के 'पेपर लीक न होने' के दावे को घोर बेइमानी बताते हुए सरकार से पूछा है कि अगर परीक्षा से पहले बाजार में घूम रहा दर्जनों हूबहू सवालों वाला 'गेस पेपर' लीक नहीं था, तो आखिर असली लीक क्या होता है और सरकार इसे क्यों छुपा रही है?

NEET Paper Leak

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 23, 2026

NEET Paper Leak : नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर सामने आई अनियमितताओं को लेकर देश में एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए एक गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि साल 2018 में जब से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन हुआ है, तब से ही मौजूदा सरकार और उसका पूरा प्रशासनिक तंत्र देश के पेपर लीक माफिया के साथ मिलकर काम कर रहा है. कांग्रेस नेता के अनुसार, सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस माफिया तंत्र को संरक्षण दे रही है और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में होने वाली धांधली व भ्रष्टाचार को पूरी तरह से दबाने की कोशिशों में जुटी हुई है.

एनटीए महानिदेशक के दावों पर भड़के कांग्रेस नेता

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हालिया मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए केंद्र पर सच्चाई को छिपाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कुछ खबरों के मुताबिक, एनटीए के डायरेक्टर जनरल (महानिदेशक) ने एक संसदीय समिति के समक्ष यह अजीबोगरीब दावा किया है कि नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक ही नहीं हुआ था. जयराम रमेश ने एजेंसी के इस बयान को बेहद शर्मनाक, गैर-जिम्मेदाराना और चौंकाने वाली बेईमानी करार दिया. उन्होंने सबूतों का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले एक ऐसा ‘गेस पेपर’ सोशल मीडिया और छात्रों के बीच धड़ल्ले से घूम रहा था, जिसमें मुख्य परीक्षा में पूछे गए दर्जनों सवाल हूबहू शामिल थे. उन्होंने सरकार से तीखा सवाल पूछा कि अगर परीक्षा से पहले असली सवालों का बाहर आ जाना पेपर लीक नहीं है, तो फिर इसे क्या कहा जाएगा? सरकार इस सच को देश से क्यों छिपा रही है?

पिछली गलतियों से सबक न लेने का नतीजा

जयराम रमेश ने मोदी सरकार की पिछली कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार पहले भी नीट-यूजी 2024 के दौरान सामने आई व्यापक धांधली और गड़बड़ियों को कालीन के नीचे दबाने का प्रयास कर चुकी है. उन्होंने देश को याद दिलाया कि यदि साल 2024 में ही सरकार ने अपनी नाकामी और सच्चाई को स्वीकार कर लिया होता तथा इस शिक्षा माफिया के खिलाफ कोई ठोस व कठोर दंडात्मक कार्रवाई की होती, तो आज साल 2026 में देश के लाखों होनहार छात्रों को इस मानसिक प्रताड़ना और अनिश्चितता के दौर से नहीं गुजरना पड़ता. उन्होंने तंज कसा कि सरकार की लापरवाही की वजह से ही आज यह संकट दोबारा देश के सामने खड़ा हुआ है.

यूजीसी-नेट मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और जांच के रवैये पर उठाए सवाल

नीट के साथ-साथ कांग्रेस नेता ने यूजीसी-नेट (UGC-NET) 2024 परीक्षा विवाद का भी विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक तरफ एनटीए ने खुद गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए उस समय परीक्षा को आनन-फानन में रद्द कर दिया था, वहीं दूसरी तरफ सीबीआई ने कोर्ट में इस मामले पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी, जिसमें परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता होने से साफ इनकार कर दिया गया है. जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि माननीय अदालत द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद सीबीआई का रवैया इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच करने और पीड़ित छात्रों को न्याय सुनिश्चित कराने वाला कतई दिखाई नहीं देता.

‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ अब देश के लाखों युवाओं के लिए बनी ‘नेशनल ट्रॉमा एजेंसी’

केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा नियामक संस्था एनटीए (NTA) का नाम अब बदल जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के लाखों-करोड़ों युवाओं के लिए यह संस्थान अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं, बल्कि ‘नेशनल ट्रॉमा एजेंसी’ बन चुका है, जो छात्रों को केवल मानसिक तनाव और अवसाद दे रहा है. जयराम रमेश ने एनटीए के अलावा शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), एनसीईआरटी (NCERT) और देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों की मौजूदा प्रशासनिक कार्यप्रणाली और उनकी स्वायत्तता पर भी बड़े सवाल उठाए हैं.

शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना

अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में जयराम रमेश ने देश के शिक्षा मंत्री को सीधे आड़े हाथों लिया. उन्होंने मौजूदा शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भाई-भतीजावाद और चाटुकारिता का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के राज में देश में पेशेवर उत्कृष्टता, ईमानदारी और काबिलियत की कोई कद्र नहीं बची है. इसके विपरीत, जो लोग सत्ताधारी दल और उनकी विचारधारा के सबसे करीब हैं, उन्हें ही देश के बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा एजेंसियों के शीर्ष पदों पर बैठाया जा रहा है. जयराम रमेश ने मांग की कि जब तक इस पूरी व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण नहीं होगा और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक देश के युवाओं का भविष्य अंधकार में ही रहेगा.

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