NCERT New Module: कक्षा 9वीं से 12वीं तक बदलेगी पढ़ाई? NCERT के नए AI मॉड्यूल में क्या है खास

NCERT ने कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI पर नया मॉड्यूल तैयार किया है। इसमें डिजिटल सुरक्षा, गलत जानकारी की पहचान और AI कंटेंट की जांच करना सिखाया जाएगा। खास बात यह है कि गतिविधियां बिना कंप्यूटर के भी कराई जा सकेंगी।

NCERT के नए AI मॉड्यूल में क्या है खास

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 24, 2026

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NCERT New Module: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक प्रारंभिक मॉड्यूल विकसित किया है। शिक्षा मंत्रालय के तहत तैयार इस मॉड्यूल का उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, तार्किक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता को मजबूत करना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार की गई है।

बिना पहले से जानकारी के भी सीख सकेंगे AI

बिना पहले से जानकारी के भी सीख सकेंगे AI
बिना पहले से जानकारी के भी सीख सकेंगे AI

इस मॉड्यूल की खास बात यह है कि विद्यार्थियों को इसे समझने के लिए कंप्यूटर या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पहले से विशेष जानकारी होना जरूरी नहीं है। शुरुआती स्तर को ध्यान में रखकर तैयार की गई सामग्री के माध्यम से छात्र तकनीक की बुनियादी अवधारणाओं को समझ सकेंगे। इसका लक्ष्य केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और समस्याओं के नए समाधान खोजने की आदत विकसित करना भी है।

क्या है कंप्यूटेशनल थिंकिंग?

NCERT की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कंप्यूटेशनल थिंकिंग समस्याओं को पहचानने, उन्हें छोटे हिस्सों में समझने और व्यवस्थित तरीके से समाधान खोजने की पद्धति है। इस दृष्टिकोण से विद्यार्थी किसी समस्या को तार्किक ढंग से देखना और उपलब्ध जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालना सीख सकते हैं। यह कौशल पढ़ाई के साथ-साथ रोजमर्रा की जिंदगी में भी उपयोगी हो सकता है। मॉड्यूल में विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस तरह काम करता है और दैनिक जीवन में इसकी क्या भूमिका है।

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गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यास से होगी पढ़ाई

मॉड्यूल में अनुभव आधारित और गतिविधि केंद्रित शिक्षण पद्धति को महत्व दिया गया है। इसके तहत समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास, प्रयोग और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को विषय समझाने की योजना है। इससे छात्रों को केवल जानकारी याद करने के बजाय अवधारणाओं को समझने और उनका उपयोग करने का अवसर मिलेगा। ऐसी गतिविधियां रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने और मिलकर समस्याओं का समाधान खोजने में भी मदद कर सकती हैं।

बिना डिजिटल डिवाइस के भी कर सकेंगे गतिविधियां

बिना डिजिटल डिवाइस के भी कर सकेंगे गतिविधियां
बिना डिजिटल डिवाइस के भी कर सकेंगे गतिविधियां

डिजिटल संसाधनों की असमान उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूल को इस तरह तैयार किया गया है कि गतिविधियां कंप्यूटर या अन्य डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ इनके बिना भी कराई जा सकें। इससे सीमित इंटरनेट सुविधा या कम डिजिटल संसाधन वाले स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सीखने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था तकनीकी शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

AI कंटेंट की जांच और डिजिटल सुरक्षा पर जोर

मॉड्यूल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया गया है। विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा, व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और इंटरनेट पर फैलने वाली गलत जानकारी को पहचानने के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्हें AI से तैयार सामग्री पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उसकी सटीकता और विश्वसनीयता जांचने की सीख दी जाएगी। इसके साथ ही तकनीक के इस्तेमाल में मानवीय विवेक, नैतिक जिम्मेदारी और रचनात्मक सोच के महत्व को भी समझाया जाएगा।