NCERT Controversy 2026: अब 8वीं की किताबों में नहीं पढ़ेंगे न्यायपालिका का भ्रष्टाचार, हटाया जाएगा बड़ा हिस्सा

एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की नागरिक शास्त्र की पाठ्यपुस्तक में एक चौंकाने वाला बदलाव किया है। न्यायपालिका के कामकाज में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार से जुड़े महत्वपूर्ण अंशों को सिलेबस से बाहर कर दिया गया है। क्या यह शिक्षा का शुद्धिकरण है या छात्रों से जवाबदेही का अधिकार छीनने की कोशिश? विस्तार से समझें।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

NCERT Controversy 2026: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में किए गए बदलावों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस किताब में न्यायपालिका (Judiciary) को लेकर लिखी गई बातों पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। सरकार का तर्क है कि स्कूली छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकें प्रेरणादायक और सकारात्मक होनी चाहिए। किताब के उस हिस्से को हटाने की तैयारी की जा रही है जिसमें भारतीय न्यायिक प्रणाली की खामियों और भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया है।

किताब में क्या था आपत्तिजनक कंटेंट?

NCERT की नई सोशल साइंस की किताब में भारतीय न्यायपालिका की भूमिका समझाते हुए इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को एक बड़ी समस्या के रूप में पेश किया गया था। किताब में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि हमारे ज्युडिशियल सिस्टम में अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार मौजूद है। इसके अलावा, देश की विभिन्न अदालतों में लंबित पड़े करोड़ों मामलों (Pending Cases) का डेटा देते हुए इसे न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया गया था। इन दावों को पुख्ता करने के लिए किताब में जस्टिस बी.आर. गवई के एक पुराने बयान को भी उद्धृत (Quote) किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं”

इस मामले पर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी को भी इस संवैधानिक संस्था की छवि धूमिल करने की इजाजत नहीं देंगे। अदालत ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर सुनवाई कर सकता है। सीजेआई ने इस सामग्री को एक “सुनियोजित और सोची-समझी कोशिश” करार दिया। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और इस मुद्दे से कैसे निपटना है, उन्हें अच्छी तरह पता है।

कपिल सिब्बल और सिंघवी ने उठाया मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा उठाया गया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के सामने चिंता व्यक्त की कि स्कूली छात्रों को इस तरह की नकारात्मक सामग्री पढ़ाई जा रही है, जो न्यायपालिका के प्रति उनके मन में गलत धारणा पैदा कर सकती है। सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित कार्रवाई की जाए। मुख्य न्यायाधीश ने मुद्दा संज्ञान में लाने के लिए वकीलों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्हें इस संबंध में कई संदेश प्राप्त हुए हैं।

पॉजिटिव कंटेंट पर सरकार का जोर

सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्कूली शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास और उन्हें राष्ट्र के प्रति जागरूक बनाना है। ऐसे में न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण संस्था के बारे में विवादास्पद या नकारात्मक टिप्पणी करना उचित नहीं है। जस्टिस गवई को कोट किए जाने पर भी ऐतराज जताया गया है। सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम में सुधार की आवश्यकता है ताकि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के स्तंभों के बारे में सकारात्मक और गरिमापूर्ण जानकारी मिले।

आगे की राह और NCERT का रुख

भारी विरोध और सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद अब NCERT इस कंटेंट को संशोधित करने या हटाने की प्रक्रिया शुरू करने वाला है। यह पहली बार नहीं है जब NCERT के सिलेबस में बदलाव को लेकर चर्चा हुई हो, लेकिन न्यायपालिका और शिक्षा जगत के बीच ऐसा टकराव कम ही देखने को मिलता है। आने वाले दिनों में अदालत इस पर आधिकारिक आदेश जारी कर सकती है, जिससे यह तय होगा कि भविष्य में संवैधानिक संस्थाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को स्कूली किताबों में किस तरह पेश किया जाएगा।

Read More : CM Yogi Japan Visit: CM योगी का टोक्यो दौरा, मिंडा कॉर्पोरेशन के लीडर्स से की मुलाकात