Petrol Diesel Price Hike: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बीच भारत की प्रमुख प्राइवेट फ्यूल रिटेलर, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कंपनी ने पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इजराइल-ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है।
वैश्विक तेल संकट और मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नायरा एनर्जी, जो देश भर में लगभग 7,000 पेट्रोल पंपों का संचालन करती है, ने इस बढ़ी हुई लागत का कुछ भार सीधे ग्राहकों पर डालने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, इनपुट कॉस्ट (उत्पादन लागत) में हुई इस बेतहाशा वृद्धि के कारण प्राइवेट कंपनियों के लिए पुरानी दरों पर ईंधन बेचना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा था।
निजी बनाम सरकारी तेल कंपनियां
भारत में फ्यूल मार्केटिंग कंपनियों के बीच कीमतों को लेकर दो अलग-अलग रुख देखने को मिल रहे हैं। जहां नायरा एनर्जी ने कीमतें बढ़ा दी हैं, वहीं रिलायंस-बीपी (Jio-bp) ने भारी नुकसान के बावजूद फिलहाल दरों को स्थिर रखा है। दूसरी ओर, बाजार पर 90% कब्जा रखने वाली सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) अभी भी पुराने रेट पर टिकी हुई हैं। जानकारों का कहना है कि सरकारी कंपनियों को “अच्छे कॉर्पोरेट नागरिक” के रूप में सरकार का समर्थन प्राप्त होता है, जबकि निजी विक्रेताओं को नुकसान की भरपाई के लिए कोई सरकारी मुआवजा नहीं मिलता, जिससे उनके पास रिटेल कीमतें (Retail Prices) बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
विभिन्न राज्यों में मूल्य वृद्धि का प्रभाव
नायरा द्वारा घोषित 5 और 3 रुपये की यह वृद्धि बेस प्राइस पर आधारित है, लेकिन असल जेब ढीली स्थानीय करों के कारण होगी। अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) की दरें भिन्न होने के कारण कई स्थानों पर पेट्रोल की कीमत में वास्तविक बढ़ोतरी 5.30 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गई है। हालांकि, दिल्ली जैसे महानगरों में सामान्य पेट्रोल अब भी 94.77 रुपये पर स्थिर है, क्योंकि वहां सरकारी कंपनियों का प्रभुत्व है। लेकिन प्रीमियम और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में पहले ही वृद्धि की जा चुकी है, जिससे थोक खरीदारों पर दबाव बढ़ गया है।
कच्चे तेल का आयात और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता सुरक्षा जोखिम
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। बीमा कंपनियों द्वारा कवरेज बंद करने से टैंकरों का संचालन ठप होने की कगार पर है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इस महीने 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुकी हैं, जो सीधे तौर पर भारतीय आयात निर्भरता के लिए खतरे की घंटी है।
प्रीमियम ऑक्टेन फ्यूल और सामान्य पेट्रोल के बीच बढ़ता अंतर
तेल कंपनियों ने सामान्य ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की है, लेकिन प्रीमियम ग्रेड और इंडस्ट्रियल डीजल की दरें बढ़ा दी गई हैं। दिल्ली में 95-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत अब 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। सामान्य पेट्रोल (91-92 ऑक्टेन) और हाई-परफॉर्मेंस इंजनों के लिए बने प्रीमियम पेट्रोल के बीच यह बढ़ता अंतर दर्शाता है कि कंपनियां अब चुनिंदा सेक्टर्स से अपने मार्जिन की भरपाई करने की रणनीति अपना रही हैं।









