NASA Artemis-2 Update: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) को अपने सबसे शक्तिशाली मून रॉकेट ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) के अंतिम परीक्षण के दौरान एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा है। आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन की तैयारियों के तहत किए जा रहे ‘वेट ड्रेस रिहर्सल’ टेस्ट में रॉकेट के भीतर हाइड्रोजन फ्यूल लीक की समस्या पाई गई। यह परीक्षण एक तरह की फाइनल प्रैक्टिस थी, जिसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाना था कि रॉकेट लॉन्च के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। हाइड्रोजन लीक की इस घटना ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इसी तरह की समस्या ने साल 2022 में आर्टेमिस I मिशन को भी महीनों तक लॉन्च पैड पर रोके रखा था।
फ्यूलिंग ऑपरेशन और रिसाव की चुनौती: इंजीनियरों ने अपनाया पुराना अनुभव
कैनेडी स्पेस सेंटर में जब 322 फुट लंबे इस विशाल रॉकेट में ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उसके कुछ घंटों बाद रॉकेट के निचले हिस्से (Engine Section) में अत्यधिक हाइड्रोजन जमा होने के संकेत मिले। स्थिति को देखते हुए लॉन्च टीम ने फ्यूलिंग की प्रक्रिया को कम से कम दो बार रोका। टीम ने रिसाव को नियंत्रित करने के लिए उन तकनीकों का सहारा लिया जिन्हें 2022 के आर्टेमिस I टेस्ट फ्लाइट के दौरान विकसित किया गया था। तमाम बाधाओं के बावजूद, नासा रॉकेट में 7,00,000 गैलन से अधिक सुपर-कोल्ड लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरने में सफल रहा। बाद में इसे ‘रिप्लेनिश मोड’ में डाल दिया गया, जिससे यह माना गया कि रिसाव अब स्वीकार्य सीमा के भीतर है।
क्वारंटाइन में बैठे अंतरिक्ष यात्री: ह्यूस्टन से टेस्ट पर पैनी नजर
इस ऐतिहासिक मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री—कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडाई मिशन स्पेशलिस्ट जेरेमी हेंसन—पिछले डेढ़ हफ्ते से क्वारंटाइन में हैं। वे ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर से इस पूरे परीक्षण की बारीकियों पर नजर रखे हुए हैं। यदि आज का यह टेस्ट पूरी तरह सफल घोषित किया जाता है, तो नासा 8 फरवरी को इस मिशन को लॉन्च करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, लॉन्च विंडो 11 फरवरी तक ही उपलब्ध है। यदि इस अवधि में रॉकेट उड़ान नहीं भर पाता है, तो तकनीकी कारणों और चंद्रमा की स्थिति को देखते हुए मिशन को मार्च तक टालना पड़ सकता है।
10 दिनों का रोमांचक सफर: चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगा ओरियन
आर्टेमिस II नासा का एक बेहद महत्वाकांक्षी मिशन है। यह 10 दिनों का एक क्रूड मिशन (मानव सहित) होगा, जिसमें ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के सबसे करीब से गुजरेगा और चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far Side) का चक्कर लगाकर सीधे पृथ्वी पर वापस लौटेगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की कक्षा में जाना या लैंडिंग करना नहीं, बल्कि ओरियन कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, संचार प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण में परीक्षण करना है। यह परीक्षण भविष्य के उन मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा जहाँ अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे और वहां लंबी अवधि तक रहेंगे।
आधी सदी बाद चांद की ओर वापसी: अपोलो के बाद नया अध्याय
आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए नासा लगभग 50 साल बाद एक बार फिर इंसानों को चंद्रमा की यात्रा पर भेज रहा है। अपोलो मिशन के समाप्त होने के बाद यह पहली बार है जब कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब जाएगा। यह सफलता न केवल नासा के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए एक बड़ी छलांग होगी। वर्तमान में कड़ाके की ठंड और तकनीकी खामियों ने लॉन्च विंडो को थोड़ा छोटा कर दिया है, लेकिन वैज्ञानिकों को भरोसा है कि हाइड्रोजन लीक की समस्या पर काबू पा लिया जाएगा। यह मिशन आने वाले समय में मंगल ग्रह पर इंसानी बस्तियां बसाने के सपने को साकार करने की दिशा में पहला कदम है।
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