Nandigram Election : नंदीग्राम में मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट से राहत,तदान तक कार्रवाई पर रोक, जानिए पूरा मामला

नंदीग्राम में मतदान से पहले मिलन प्रधान को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अदालत ने शांतिपूर्ण मतदान होने तक उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है। आखिर मामला क्या है, कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया और इसका चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ेगा?

Nandigram Election

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

Nandigram Election : नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम ज़मानत के खिलाफ राज्य सरकार की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा, पहले वोटिंग शांतिपूर्ण होने दें। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘उन्हें लड़ने दें, वोटिंग शांतिपूर्ण होने दें।’ नंदीग्राम और रेजिनगर में उपचुनाव कल यानी 6 अक्टूबर को हैं। इस केस की सुनवाई अगले दिन हो सकती है। हालांकि राज्य सरकार ने उसी दिन सुनवाई और कोई भी निर्देश जारी करने की रिक्वेस्ट की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। दूसरी ओर, जस्टिस जयमाल्य बागची ने इस केस से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह 2007 की घटना है। उन्हें यहां दिक्कत है। वह इस केस में वकील थे।

2007 की FIR की बात

केस की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘इस केस पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है। गैर-जमानती वारंट कई साल पहले जारी किया गया था।’ मिलन के वकील अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा, ‘कल चुनाव है। मिलन प्रधान 21 दिन की अंतरिम बेल पर हैं। अब 2007 की FIR की बात हो रही है।’ इस  पर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘पहले वोटिंग शांतिपूर्ण होने दें। उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने नॉन-बेलेबल वारंट होने के बावजूद 19 साल से इस व्यक्ति को गिरफ्तार क्यों नहीं किया है।’

राज्य की तरफ से क्या दलील दी गई?

मेहता ने दलील दी, ‘हत्या का आरोप है। यह बम ब्लास्ट की घटना से भी जुड़ा है। मैं उसका रोल साबित करूंगा।’ यह सुनकर मनुसिंघवी ने कहा कि सुनवाई आज होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 21 दिन की अंतरिम बेल पर होने के बाद भी मिलन प्रधान को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, चीफ जस्टिस ने वोटों की गिनती होने तक कोई दखल नहीं दिया।

6 अक्टूबर को वोट

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव मंगलवार, 6 अक्टूबर को होगा। मिलन प्रधान इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। ममता बनर्जी की पार्टी वोटिंग में उनका साथ दे रही है। इस बीच, परिवार का आरोप है कि चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर नाम घोषित होने के बाद से मिलन को कई पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया है।इस बीच, उन्हें 2007 के मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि हाई कोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच ने मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक सभी मामलों में अंतरिम ज़मानत दे दी थी। शर्त यह थी कि चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद उन्हें हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करना होगा। राज्य ने हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

यह लोकतंत्र की जीत है, प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा

प्रांत कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हमारे उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम ज़मानत रद्द करने की राज्य सरकार की गलत कोशिश आज कोर्ट में नाकाम हो गई। हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले मिलन प्रधान को बिना किसी रुकावट के चुनाव लड़ने का मौका दिया है। यह लोकतंत्र की जीत है, यह नंदीग्राम के सभी लोगों की जीत है।”

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