Mohan Bhagwat Cast Vote: महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में आज महानगरपालिका चुनाव के लिए उत्साह का माहौल है। मतदान प्रक्रिया शुरू होते ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र में मतदान के महत्व पर जोर देते हुए ‘नोटा’ (NOTA) के विकल्प को लेकर एक बड़ा बयान दिया, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
BMC Election: मनीष सिसोदिया की मतदाताओं से गुहार, ‘सिर्फ पार्षद नहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य को चुनें’
सुबह-सवेरे बूथ पहुंचे भागवत
नागपुर के महल इलाके में स्थित मतदान केंद्र पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सुबह करीब 7:30 बजे ही पहुंच गए थे। उन्होंने शुरुआती मतदाताओं में शामिल होकर अपनी नागरिक जिम्मेदारी निभाई। वोट डालने के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और चुनाव एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि वोट देना केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी है, जिसे निभाना राष्ट्रहित में आवश्यक है।
‘नोटा’ (NOTA) के विकल्प पर कड़ा संदेश
आपको बता दे कि, मतदान के दौरान उपलब्ध ‘इनमें से कोई नहीं’ (None of the Above) यानी नोटा के विकल्प पर मोहन भागवत ने गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने तर्क दिया कि नोटा का चयन करने का अर्थ है कि आप सभी प्रत्याशियों को खारिज कर रहे हैं, लेकिन ऐसा करने से अनजाने में उन अवांछित उम्मीदवारों को फायदा पहुंचता है जिन्हें समाज का एक बड़ा वर्ग पसंद नहीं करता। उनके अनुसार, अपनी असहमति जताने के लिए नोटा एक जरिया तो है, लेकिन किसी योग्य व्यक्ति का चुनाव न करना लोकतंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है।
भैयाजी जोशी की अपील और जनमत का महत्व
मोहन भागवत के साथ ही आरएसएस के पूर्व सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र और जनमत (Public Mandate) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चुनी हुई सरकारें जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होती हैं। जोशी ने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे घरों से बाहर निकलें और भारी संख्या में मतदान करें ताकि एक ऐसी सरकार बन सके जो लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतर सके।
नागपुर नगर निगम का पिछला चुनावी इतिहास
इस बार का NMC चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। यदि पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 151 सीटों में से 108 पर प्रचंड जीत हासिल कर अपना दबदबा कायम किया था। वहीं, विपक्षी खेमे में कांग्रेस ने 28, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 10 और अविभाजित शिवसेना व एनसीपी ने क्रमशः दो और एक सीट जीती थी। इस बार बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच मोहन भागवत की ‘नोटा’ वाली अपील का असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
योग्य उम्मीदवार के चयन पर जोर
आरएसएस प्रमुख ने अंत में सभी नागरिकों से अपील की कि वे योग्य उम्मीदवार (Qualified Candidate) की पहचान करें और जनहित को ध्यान में रखकर ही वोट दें। उन्होंने कहा कि “किसी को वोट न देने से बेहतर है कि किसी उचित व्यक्ति को वोट दिया जाए।” भागवत का यह बयान उन उदासीन मतदाताओं के लिए एक बड़ी सीख माना जा रहा है जो अक्सर मतदान के दिन घर पर रहना या नोटा दबाना पसंद करते हैं।










