Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड, 5 की मौत के बाद मंत्री क्यों ‘खामोश’? विपक्ष ने घेरा!

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में लगी भीषण आग में 5 लोगों की दर्दनाक मौत और 20 से अधिक लोगों के झुलसने की घटना ने बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।

Muzaffarpur Hospital Fire

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 4, 2026

Muzaffarpur Hospital Fire: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुई एक भीषण आगजनी की घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। अस्पताल के ICU में लगी इस आग ने न केवल पांच लोगों की जान ले ली, बल्कि 20 से अधिक लोगों को बुरी तरह झुलसा दिया है। इस त्रासदी के बाद अब पूरे बिहार में अस्पतालों की सुरक्षा, फायर सेफ्टी मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। लेकिन इस दुखद घटना के बीच सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की उस ‘खामोशी’ की हो रही है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

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मंत्री की चुप्पी और विपक्ष का तीखा प्रहार

हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर जब स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी मंत्री पर थी, तब निशांत कुमार पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। एयरपोर्ट पर जब पत्रकारों ने उनसे मुजफ्फरपुर अग्निकांड पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और खामोश रहे। मंत्री की इस चुप्पी को विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बना लिया है और सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।

बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने तंज कसते हुए कहा, “राज्य में इतनी बड़ी आपदा आ गई और स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली की सैर पर निकल गए। CAG की रिपोर्ट पहले ही कह चुकी है कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद ‘ICU’ में है, और अब अस्पताल ही मरीजों के लिए काल बन रहे हैं।” वहीं, राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा करार दिया। उन्होंने कहा कि मृतकों के प्रति संवेदना के दो शब्द न कहना यह दर्शाता है कि सरकार को आम जनता की जान की कोई परवाह नहीं है।

ICU बना मौत का जाल, शॉर्ट सर्किट से फैली तबाही

प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के अनुसार, अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित ICU में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लगी। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट से पहले एयर कंडीशनर (AC) में धमाका हुआ, जिसके बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। घना धुआं कुछ ही पलों में पूरे अस्पताल में फैल गया, जिससे वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों के बीच चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने और फंसे हुए मरीजों को रेस्क्यू करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

विवाद बढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर जागे मंत्री

चौतरफा आलोचना और बढ़ते विवाद के बाद अंततः स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने एक पोस्ट के जरिए घटना पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। मंत्री ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने घायलों के समुचित इलाज और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

निजी अस्पतालों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने बिहार के निजी अस्पतालों में चल रहे ‘सुरक्षा तंत्र’ की सच्चाई को सामने ला दिया है। बड़ा सवाल यह है कि अस्पतालों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) कैसे मिलता है? क्या स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन अस्पतालों की नियमित जांच होती है? विपक्ष का सीधा आरोप है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी में ढिलाई न बरती होती और समय-समय पर अस्पतालों का फायर ऑडिट किया जाता, तो शायद यह बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। फिलहाल, पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या यह मामला फाइलों में ही दब जाएगा।

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