Muzaffarnagar News: 24 घंटे में एक रोटी, कोड़ों की मार! बंधुआ मजदूरों पर खौफनाक अत्याचार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक डिस्पोजेबल क्रॉकरी फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी का भयावह मामला सामने आया है। 13 मजदूरों को दो साल से कैद में रखकर अमानवीय यातनाएं दी जा रही थीं। पुलिस ने छापेमारी कर फैक्ट्री मालिकों को गिरफ्तार किया है और टॉर्चर के कई खौफनाक उपकरण बरामद किए हैं। प्रशासन अब पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है।

Muzaffarnagar News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 25, 2026

Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से बंधुआ मजदूरी का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। एक डिस्पोजेबल क्रॉकरी फैक्ट्री में 13 मजदूरों को दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया। इन पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें रोजगार का सुनहरा सपना दिखाकर यहां लाया गया था, लेकिन फैक्ट्री पहुंचते ही उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए। उन्हें न केवल कैद में रखा गया, बल्कि भूखा रखकर बेरहमी से पीटा भी जाता था।

एक मजदूर की जान बचाकर भागने से खुला राज

बताते चले कि, इस अमानवीय घटना का खुलासा तब हुआ जब फैक्ट्री से जान बचाकर भागा एक मजदूर सीधे पुलिस के पास पहुंचा। उसकी सूचना पर श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान सभी 13 बंधक मजदूरों को मुक्त कराया गया, जिन्हें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल जैसे दूर-दराज के इलाकों से बहला-फुसलाकर लाया गया था।

टॉर्चर के लिए इस्तेमाल होते थे भाले और पिटबुल कुत्ते

छापेमारी के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री मालिकों शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार किया है। मौके से पुलिस ने टॉर्चर के भयानक उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें भाले, फैन बेल्ट से बने कोड़े और डंडे शामिल हैं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें भागने से रोकने के लिए परिसर में दो खतरनाक पिटबुल कुत्ते छोड़े गए थे। वहीं, अंकित नाम के एक मजदूर ने आपबीती बताते हुए कहा कि मारपीट में उसका कान तक कट गया था।

24 घंटे में सिर्फ एक बार चोकर की सूखी रोटी

पीड़ितों ने बताया कि उन्हें 24 घंटों में केवल एक बार चोकर से बनी सूखी रोटी दी जाती थी। जो कोई भी वेतन, अच्छे भोजन या घर जाने की बात करता, उसे यातनाओं का सामना करना पड़ता था। यह शोषण केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक भी था। मजदूरों के शरीर पर मौजूद निशान उनकी दो साल की भयावह कैद की कहानी खुद बयां कर रहे हैं, जो प्रशासन की कार्रवाई को और अधिक गंभीर बनाती है।

प्रशासन की सख्ती के बाद घर वापसी की तैयारी

मुजफ्फरनगर प्रशासन अब उन गंभीर आरोपों की भी जांच कर रहा है, जिनमें फैक्ट्री में कुछ मजदूरों की मौत की बात कही गई है। फिलहाल, मुक्त कराए गए सभी मजदूरों की मेडिकल जांच कराई जा रही है। अधिकारियों ने सम्मानपूर्वक मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया और उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस भेजने की व्यवस्था की है। पुलिस का कहना है कि सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।