Mukul Roy Passes Away: देश के पूर्व रेल मंत्री और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता मुकुल रॉय का निधन हो गया है। 73 वर्षीय मुकुल रॉय लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने देर रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि अस्पताल और उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने की। देश और प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।
मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति में चाणक्य के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में से एक रहे मुकुल रॉय ने साल 2015 तक TMC में महासचिव के रूप में कार्य किया और कांग्रेस एवं सीपीएम नेताओं को TMC में शामिल कराया।
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TMC से BJP और फिर वापस TMC

साल 2017 में मुकुल रॉय को TMC से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होकर बंगाल की राजनीति में नया अध्याय शुरू किया। TMC छोड़ने के बाद वे BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने और 2020 के समय पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हालांकि, जून 2021 में विधायक रहते हुए उन्होंने BJP छोड़कर पुनः TMC में वापसी की। इस कदम के कारण उन्हें दलबदल के आरोपों का सामना करना पड़ा और नवंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें दलबदल कानून के तहत विधायक पद से अयोग्य घोषित किया।
संसद और मंत्रालय का अनुभव
मुकुल रॉय 2006 में राज्यसभा सदस्य बने और 2009 से 2019 तक सांसद रहे। UPA-2 सरकार में उन्हें जहाजरानी राज्य मंत्री बनाया गया था। इसके अलावा, 2011 से 2012 तक वे देश के रेल मंत्री भी रहे। 2011 का विधानसभा चुनाव जीताने में उनका रणनीतिक योगदान रहा और ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
मुकुल रॉय ने शहरी विकास मंत्रालय भी संभाला। उनकी रणनीति के कारण ही TMC ने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन का अंत किया और बंगाल में पार्टी का झंडा गाड़ा। उनके राजनीतिक कौशल और चुनावी रणनीति के चलते ही 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने बंगाल में 18 सीटें जीती।
विवाद और निष्कासन
मुकुल रॉय का नाम शारदा चिटफंड घोटाला और नारदा स्टिंग ऑपरेशन जैसे मामलों में आया। इन विवादों के चलते उनके और ममता बनर्जी के बीच दूरी बढ़ी और उन्हें TMC से निष्कासित कर दिया गया। निष्कासन के बाद उन्होंने BJP में शामिल होकर बंगाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। एक समय ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी रहे, फिर BJP में शामिल हुए और अंततः TMC में लौट आए। उनके निधन से पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नेता की कमी महसूस होगी। उनके योगदान और रणनीतिक कौशल को राजनीतिक circles में हमेशा याद रखा जाएगा।
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