UP News: यूपी में सामूहिक विवाह की रफ्तार तेज, 17,758 जोड़ों ने लिए सात फेरे

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 17,758 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। सरकार ने 72,448 सामूहिक विवाह का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। पीलीभीत 1,271 विवाह के साथ प्रदेश में सबसे आगे है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 4, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह को लेकर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 17,758 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में प्रदेशभर में 72,448 सामूहिक विवाह कराने का है। योजना की बढ़ती रफ्तार से बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिल रही है।

72 हजार से अधिक आवेदन, पात्रता जांच पर जोर

बताते चले कि, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अब तक 72,787 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। विभाग की ओर से इन आवेदनों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। जांच के दौरान अब तक 20,042 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 7,245 आवेदन अपात्र पाए गए हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

बेटियों के विवाह में आर्थिक अभाव न बने बाधा

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का संकल्प है कि आर्थिक अभाव किसी बेटी के सम्मानजनक विवाह में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसी उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार तकनीक के माध्यम से सत्यापन व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है, ताकि पात्र परिवारों को बिना किसी परेशानी के योजना का लाभ मिल सके।

पीलीभीत सामूहिक विवाह में सबसे आगे

प्रदेश में सामूहिक विवाह संपन्न कराने के मामले में पीलीभीत सबसे आगे है। जिले में अब तक 1,271 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। इसके बाद शाहजहांपुर का स्थान है, जहां 1,063 जोड़ों ने विवाह किया है। वहीं सुल्तानपुर में 1,040 और रामपुर में 1,031 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि जिलों में योजना को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है।

योजना में पारदर्शिता के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आवेदकों के सत्यापन के लिए ई-केवाईसी की व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए आय और जाति प्रमाण पत्रों का डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है। इससे फर्जी या अपात्र आवेदनों की पहचान करने में मदद मिल रही है और योजना की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक व्यवस्थित हो रही है।

आधार आधारित भुगतान से सीधे खाते में पहुंचेगी सहायता

लाभार्थियों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को भी तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। विभाग के अनुसार जल्द ही आधार आधारित भुगतान व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद योजना के तहत मिलने वाली अनुदान राशि पात्र लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजी जा सकेगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में मिलती है एक लाख रुपये की मदद

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, योजना के तहत प्रत्येक पात्र जोड़े को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस राशि में 64 हजार रुपये गृहस्थी बसाने, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री और 15 हजार रुपये विवाह समारोह की आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित हैं। इस आर्थिक मदद का उद्देश्य नवविवाहित जोड़ों को शादी के बाद शुरुआती जरूरतों में सहयोग देना है।

72,448 सामूहिक विवाह का लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश सरकार ने 72,448 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य तय किया है। अब तक 17,758 जोड़ों का विवाह संपन्न हो चुका है। आने वाले समय में शेष लक्ष्य को पूरा करने के लिए योजना में और तेजी लाने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि तकनीकी सत्यापन और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के जरिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक पहुंचाया जाएगा।