MS Dhoni Birthday: जब भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास और उसके सबसे महान कप्तानों का जिक्र होगा, महेंद्र सिंह धोनी का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में सबसे ऊपर लिया जाएगा। 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे धोनी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक छोटे से शहर से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुँचने की उनकी यह कहानी दुनिया भर के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। बहुत कम लोग जानते हैं कि स्कूल के दिनों में धोनी क्रिकेट नहीं, बल्कि फुटबॉल टीम के गोलकीपर हुआ करते थे, लेकिन उनके कोच की एक पारखी नजर ने उन्हें विकेटकीपिंग करने की सलाह दी और इसी एक फैसले ने भारतीय क्रिकेट का भविष्य हमेशा के लिए बदल दिया।
रेलवे की नौकरी से इंटरनेशनल क्रिकेट के ‘सिक्सर किंग’ बनने तक का सफर
अपनी प्रतिभा को साबित करने के संघर्ष के दौरान धोनी ने भारतीय रेलवे में ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) के रूप में खड़गपुर स्टेशन पर नौकरी भी की। वे काफी समय तक नौकरी और क्रिकेट की पिच के बीच संतुलन बनाते रहे। आखिरकार, साल 2004 में उनका चयन भारतीय टीम में हुआ और उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत कुछ खास नहीं रही और वे शून्य पर रन आउट हो गए। लेकिन असली धमाका साल 2005 में हुआ, जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापट्टनम में 148 रनों की और उसके बाद श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में नाबाद 183 रनों की आक्रामक और ऐतिहासिक पारियां खेलकर विश्व क्रिकेट में अपनी धाक जमा दी। उनके लंबे-लंबे छक्कों और बेखौफ अंदाज ने उन्हें रातों-रात फैंस का चहेता बना दिया।
2007 का वह फैसला और ‘कैप्टन कूल’ का उदय
साल 2007 भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जब सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में एक युवा और लंबी जुल्फों वाले महेंद्र सिंह धोनी को पहले आईसीसी टी20 विश्व कप के लिए कप्तानी सौंपी गई। किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह युवा टीम कोई चमत्कार कर पाएगी, लेकिन धोनी ने अपनी अद्भुत रणनीति, असाधारण शांत सोच और मैदान पर सूझबूझ से भारत को पहला टी20 विश्व कप का चैंपियन बनाकर पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। इसी टूर्नामेंट के बाद दुनिया ने उन्हें ‘कैप्टन कूल’ के नाम से पुकारना शुरू किया।
आईसीसी की तीनों बड़ी ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान
इसके बाद धोनी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट ने सफलता के नए आयाम छुए। साल 2011 के वनडे विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई उनकी नाबाद 91 रनों की कप्तानी पारी और वानखेड़े स्टेडियम में लगाया गया वह ऐतिहासिक विजयी छक्का आज भी हर भारतीय के जहन में जिंदा है, जिसने भारत का 28 साल पुराना सूखा खत्म किया था। इसके बाद साल 2013 में उन्होंने भारत को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी जिताई। महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट इतिहास के एकमात्र ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने आईसीसी की तीनों प्रमुख ट्रॉफियां— टी20 विश्व कप (2007), वनडे विश्व कप (2011) और चैंपियंस ट्रॉफी (2013) अपने नाम की हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय टीम को पहली बार टेस्ट क्रिकेट में दुनिया की नंबर-1 टीम भी बनाया।
क्रिकेट के मैदान पर बेमिसाल रिकॉर्ड और ‘थाला’ का जादू
एमएस धोनी ने भारत के लिए 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने 17,000 से अधिक रन बनाए और विकेट के पीछे बिजली जैसी फुर्ती दिखाते हुए 800 से ज्यादा शिकार (कैच और स्टंपिंग) किए। इंटरनेशनल क्रिकेट के अलावा आईपीएल (IPL) में भी उनका दबदबा कायम रहा, जहाँ उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को अपनी कप्तानी में 5 बार चैंपियन बनाया। चेन्नई के फैंस उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं और प्यार से ‘थाला’ (बड़ा भाई/लीडर) कहते हैं।
खेल जगत में उनके इस अविश्वसनीय योगदान के लिए भारत सरकार उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित कर चुकी है। भले ही 15 अगस्त 2020 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, लेकिन आज 45 की उम्र में भी मैदान पर उनकी एक झलक पाने के लिए फैंस की दीवानगी वैसी ही है। क्रिकेट की दुनिया में उनके रिकॉर्ड भले ही कभी टूट जाएं, लेकिन करोड़ों भारतीयों के दिलों में बतौर ‘कैप्टन कूल’ उनकी जगह हमेशा अमर रहेगी।










