MP Village Property Tax: गांवों में पक्के मकानों पर लगेगा टैक्स! ₹500 से ₹1000 सालाना वसूली की तैयारी

मध्य प्रदेश के गांवों में पक्के मकानों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाने की तैयारी ने ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। प्रस्ताव के मुताबिक सालाना ₹500 से ₹1000 तक कर लिया जा सकता है। दिसंबर तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन अंतिम दरें और नियम अभी तय नहीं हुए हैं।

MP Village Property Tax

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 31, 2026

MP Village Property Tax:  मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर आय के स्रोत बढ़ाने के लिए अब गांवों में संपत्ति कर लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। जुलाई से वाटर टैक्स की व्यवस्था लागू किए जाने के बाद पंचायतें घरों और अन्य संपत्तियों पर भी कर लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसके लिए प्रदेश के गांवों में संपत्तियों का सर्वे और मैपिंग शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित योजना के अनुसार सर्वे का काम दिसंबर 2026 तक पूरा किया जा सकता है और जनवरी 2027 से संपत्ति कर लागू करने की तैयारी है।

गांवों में संपत्तियों का किया जा रहा सर्वे

प्रदेश की करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों में संपत्तियों की जानकारी जुटाने का काम शुरू किया गया है। पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक घरों तथा अन्य संपत्तियों का विवरण एकत्र कर रहे हैं। सर्वे के दौरान मकान पक्का है या कच्चा, उसकी स्थिति क्या है और संपत्ति से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। भविष्य में संपत्ति कर की दर तय करने के लिए इसी सर्वे और मैपिंग से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पक्के मकानों पर 500 से 1000 रुपये तक सालाना कर

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत गांवों में पक्के मकानों से सालाना लगभग 500 से 1000 रुपये तक संपत्ति कर वसूले जाने का विकल्प रखा गया है। वहीं कच्चे और कवेलू वाले मकानों को इस कर से राहत देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा जनजातीय क्षेत्रों के लिए संपत्ति कर की दर शून्य रखने का विकल्प भी विचाराधीन बताया जा रहा है। अंतिम दरें और छूट से जुड़े नियम सरकार की ओर से प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होंगे।

स्ट्रीट लाइट के लिए अलग कर का विकल्प

संपत्ति कर के अलावा ग्राम पंचायतें स्थानीय सुविधाओं के बदले अलग-अलग शुल्क या कर लगाने पर भी विचार कर रही हैं। जिन गांवों में पंचायत की ओर से स्ट्रीट लाइट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, वहां प्रकाश या बिजली कर लगाए जाने का विकल्प प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य गांवों में उपलब्ध सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए पंचायतों को नियमित आय उपलब्ध कराना है।

सफाई और सीवेज सुविधाओं पर भी लग सकता है शुल्क

ग्राम पंचायत स्तर पर सफाई और सीवेज जैसी सुविधाओं के लिए भी अलग कर लगाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। पंचायतों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर इन सुविधाओं के लिए मिलने वाली राशि का इस्तेमाल उनके संचालन और रखरखाव में किया जा सकेगा। इससे पंचायतों को छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिलेंगे और स्थानीय सुविधाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

वाटर टैक्स की वसूली पहले से जारी

गांवों में संपत्ति कर से पहले वाटर टैक्स की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इसके तहत परिवारों से पानी की सुविधा के लिए करीब 60 से 120 रुपये प्रतिमाह तक शुल्क लिया जा रहा है। पानी की व्यवस्था और निगरानी के लिए 20 सदस्यीय पानी समिति का गठन किया गया है। इसमें महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि जल व्यवस्था से जुड़े फैसलों में महिलाओं की भूमिका भी बनी रहे।

सरकारी संस्थानों से भी लिया जाएगा जलकर

जलकर की व्यवस्था केवल ग्रामीण परिवारों तक सीमित नहीं है। सरकारी संस्थानों को भी पानी के इस्तेमाल के लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पंचायत भवन जैसे सरकारी परिसरों से करीब 200 रुपये प्रतिमाह जलकर लेने की व्यवस्था बताई गई है। वहीं नए नल कनेक्शन के लिए करीब 1,000 से 10,000 रुपये तक शुल्क निर्धारित किया गया है।

पंचायतों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर

संपत्ति कर, वाटर टैक्स और अन्य स्थानीय शुल्कों के जरिए ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का उद्देश्य पंचायतों को पानी, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है। हालांकि संपत्ति कर लागू करने से पहले सर्वे और मैपिंग समेत जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद कर की अंतिम दर, छूट और लागू होने के नियमों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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