MP Sugar Price Row: शक्कर के दाम पर सियासत गरम, कैलाश विजयवर्गीय पर पटवारी का पलटवार

मध्य प्रदेश में शक्कर की बढ़ती कीमतों को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की महंगी शक्कर को लेकर टिप्पणी पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखा पलटवार किया। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई से परेशान गरीब और मध्यम वर्ग की परेशानियों का मजाक उड़ा रही है।

MP Sugar Price Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 28, 2026

MP Sugar Price Row:  मध्य प्रदेश में शक्कर की कीमत और उसके सेवन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर के सेवन और स्वास्थ्य को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। दोनों दलों के नेताओं के बयानों के बीच अब यह मुद्दा महंगाई, आम जनता की परेशानी और स्वास्थ्य जैसे सवालों से जुड़ गया है।

कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर को लेकर क्या कहा?

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बयान में दावा किया कि करीब 90 प्रतिशत लोगों को शुगर की बीमारी है। उन्होंने लोगों को शक्कर का सेवन कम करने या इसे छोड़ने की सलाह दी। विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि उनकी इच्छा है कि शक्कर की कीमत और अधिक बढ़ जाए, ताकि लोग इसका सेवन करना छोड़ दें। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

जीतू पटवारी ने बयान पर साधा निशाना

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विजयवर्गीय के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बेतुका और अहंकार से भरा हुआ बयान बताया। पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में आने से पहले जनता को सस्ती शक्कर, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध कराने की बातें करती थी, लेकिन अब महंगाई के सवाल पर ऐसी टिप्पणियां सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इसे आम लोगों की परेशानियों से जोड़ दिया।

महंगाई से गरीब और मध्यम वर्ग परेशान: पटवारी

जीतू पटवारी ने कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है। रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित होता है। ऐसे में किसी जरूरी खाद्य वस्तु के महंगे होने को स्वास्थ्य संबंधी तर्क से जोड़ना आम जनता की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज करने जैसा है। उन्होंने सरकार से महंगाई के मुद्दे पर संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की।

शक्कर महंगी करने के बजाय राहत दे सरकार

कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि शक्कर का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है, तो लोगों को जागरूक करने और स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक शक्कर की कीमत बढ़ने की इच्छा जताने के बजाय सरकार को यह देखना चाहिए कि आम परिवारों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े। पटवारी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को राहत देना होनी चाहिए।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

पटवारी ने शुगर की बीमारी बढ़ने के दावे को लेकर सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में लोगों में ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, तो इसके कारणों की पड़ताल होनी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने, लोगों को जागरूक करने और बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। केवल किसी खाद्य वस्तु की कीमत बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

बीजेपी और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप

शक्कर को लेकर शुरू हुई बहस अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच व्यापक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई है। कांग्रेस इसे महंगाई और जनता की आर्थिक परेशानियों से जोड़ रही है, जबकि मंत्री का बयान मूल रूप से शक्कर के सेवन और स्वास्थ्य से संबंधित था। राजनीतिक दल अपने-अपने नजरिए से इस मुद्दे को जनता के सामने रख रहे हैं। इससे प्रदेश की सियासत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

महंगाई और स्वास्थ्य दोनों बने राजनीतिक मुद्दे

इस पूरे विवाद में एक तरफ शक्कर की कीमत और दूसरी तरफ स्वास्थ्य को लेकर बहस देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के स्तर पर शक्कर के अधिक सेवन को सीमित करने की सलाह दी जाती रही है, लेकिन राजनीतिक बहस में इसका संबंध सीधे महंगाई से जुड़ गया है। कांग्रेस का जोर इस बात पर है कि खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने से पहले सरकार को उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक असर पर विचार करना चाहिए।

आने वाले दिनों में और गरमा सकती है सियासत

फिलहाल शक्कर के दाम को लेकर शुरू हुआ विवाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन चुका है। जीतू पटवारी के हमले के बाद इस मामले पर बीजेपी की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी नजर रहेगी। यदि दोनों दलों के बीच बयानबाजी जारी रहती है तो आने वाले दिनों में महंगाई, स्वास्थ्य और सरकार की नीतियों को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति और गर्म हो सकती है।

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