Sagar Liquor Case : सागर नकली शराब कांड में मोहन यादव का बड़ा एक्शन, चार अधिकारी कार्रवाई की चपेट

सागर के बंडा इलाके में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित और एक वरिष्ठ अधिकारी को मुख्यालय अटैच किया गया। अब जांच में अवैध शराब की सप्लाई और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आने का इंतजार है।

Sagar Liquor Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 6, 2026

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Sagar Liquor Case : मध्य प्रदेश के सागर जिले में नकली शराब पीने से हुई मौतों के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंडा तहसील के तीन गांवों में सामने आई इस घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एक वरिष्ठ अधिकारी को सागर से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। सरकार के इस कदम के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।

बंडा तहसील के तीन गांव प्रभावित

नकली शराब से जुड़ी घटना सागर जिले की बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में सामने आई है। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचीं। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और बीमार लोगों को उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की। साथ ही प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता देने के लिए भी प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तत्काल जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

तीन आबकारी अधिकारियों पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे को निलंबित किया गया है। इसके अलावा सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई। सरकार के इस फैसले को नकली शराब की घटना में प्रशासनिक लापरवाही के प्रति सख्त रवैये के तौर पर देखा जा रहा है। अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारियों की भी जांच की जा रही है।

वरिष्ठ अधिकारी को ग्वालियर किया अटैच

मामले में सरकार ने एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई की है। उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को सागर जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। इस कार्रवाई के जरिए सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नकली शराब की घटना में यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 6 सितंबर की सुबह ही इस घटना पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रभारी मंत्री और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। सरकार की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को राहत और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना बताई गई है।

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मरीजों के बेहतर इलाज पर जोर

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के समुचित उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा गया। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं। अस्पतालों में मरीजों की स्थिति की निगरानी के साथ चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। इसके साथ ही अस्पतालों का दौरा कर भर्ती मरीजों के उपचार, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।

जांच में सामने आएगी घटना की पूरी सच्चाई

फिलहाल नकली शराब से जुड़ी इस घटना की विस्तृत जांच जारी है। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की भूमिका तय करने के साथ शराब की आपूर्ति, वितरण और घटना के अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल की जा रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई से मामले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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