MP News: धीरेंद्र शास्त्री का चेतावनी भरा बयान, “मठ से बाहर निकलो, माला और भाला साथ रखो”

बागेश्वर धाम में 301 कन्याओं के विवाह समारोह के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि धर्म केवल “सीता-राम” कहने से सुरक्षित नहीं रहेगा; इसके लिए मठ से बाहर निकलकर सजग रहना और आत्मरक्षा के लिए माला और भाला रखना जरूरी है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 13, 2026

MP News: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा में आयोजित 301 कन्याओं के विवाह समारोह में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि धर्म केवल “सीता-राम” कहने से सुरक्षित नहीं रहेगा। आत्मरक्षा भारत के संविधान का अधिकार है और युवाओं को जूडो, कराटे, तीरंदाजी तथा तलवारबाजी जैसी विधाओं का अभ्यास करना चाहिए।

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मठ से बाहर निकलने की बात

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धीरेंद्र शास्त्री का चेतावनी भरा बयान

अपने संबोधन में शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि यदि हिन्दुत्व को बचाना है तो मठ से बाहर निकलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि माला के साथ भाला भी रखना होगा। मठ में बैठकर केवल सीता-राम कहना ठीक है, लेकिन धर्म की रक्षा के लिए बाहर आना आवश्यक है। उनका मानना है कि आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना हर नागरिक का कर्तव्य है।

युवाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा का संदेश

धीरेंद्र शास्त्री ने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जूडो और कराटे जैसी कलाएं संकट के समय काम आती हैं और हर व्यक्ति को इन्हें सीखना चाहिए। उन्होंने संविधान में दिए गए आत्मरक्षा के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिकार सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होता है।

पहले भी दिए हैं ऐसे बयान

यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री ने आत्मरक्षा और हिन्दुत्व को लेकर ऐसा वक्तव्य दिया हो। इससे पहले भी वे कई मंचों से इसी तरह के विचार व्यक्त कर चुके हैं। उनके बयानों पर अक्सर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ जाती है। ताजा बयान के बाद भी विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।

विवाह समारोह की तैयारियां

इस कार्यक्रम के दौरान 301 कन्याओं का विवाह संपन्न होना है। 13 फरवरी से विवाह समारोह की रस्में शुरू होंगी। 13 फरवरी को मेहंदी की रस्म होगी, 14 फरवरी को संगीत का कार्यक्रम और 15 फरवरी को सात फेरे, बारात तथा विदाई होगी।

आर्थिक सहयोग और उपहार

विवाह समारोह में प्रत्येक जोड़े को 30,000 रुपये की एफडी दी जाएगी। साथ ही दुल्हनों को सोने की लौंग और बाली, मंगलसूत्र और ढाई लाख रुपये की राशि भी प्रदान की जाएगी। यह आयोजन सामाजिक सहयोग और धार्मिक आस्था का संगम माना जा रहा है।

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