MP High Court Action: पेपर लीक मामलों पर बड़ा फैसला, भोपाल-इंदौर समेत 4 शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित तरीकों से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए बड़ा फैसला लिया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। आखिर इस कदम से लंबित मामलों और छात्रों की शिकायतों पर कितना असर पड़ेगा? जानिए पूरी रिपोर्ट।

MP High Court Action

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 25, 2026

MP High Court Action: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों की रोकथाम तथा उनकी त्वरित सुनवाई के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय यानी एमपी हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने राज्य के चार प्रमुख और बड़े शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में चार विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का आधिकारिक रूप से गठन किया है। यह नवनिर्मित विशेष अदालतें मुख्य रूप से ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ यानी पब्लिक एग्जामिनेशंस एक्ट 2024 और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत दर्ज किए गए तमाम मामलों का बहुत ही तेजी से और समयबद्ध तरीके से निस्तारण करेंगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की अधिसूचना

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ की धारा 8 के उपखंड (3) के तहत प्रदत्त विशेष शक्तियों का पूरी तरह से प्रयोग करते हुए अनुभवी जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों को इन नवनिर्मित विशेष अदालतों के संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत भोपाल शहर में प्रवीण पटेल (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश), इंदौर में विशाल अखंड (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश), ग्वालियर में आनंद कुमार सहलाम (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश), तथा जबलपुर में शुभ्रा सिंह (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) को इन विशेष अदालतों की कमान सौंपी गई है।

फर्जीवाड़े के खिलाफ न्याय प्रक्रिया को मिलेगी तेजी

देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और फर्जीवाड़े को लेकर छात्रों और युवाओं के बीच लगातार व्यापक विरोध-प्रदर्शन देखने को मिलते रहे हैं। युवाओं के इसी आक्रोश और न्याय प्रक्रिया को गति देने के लिए यह सख्त निर्णय लिया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वाले नकल माफियाओं, अपराधियों और आपराधिक गिरोहों पर नकेल कसने के लिए यह बहुत जरूरी था। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे असामाजिक तत्वों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाकर कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के उद्देश्य से ही इन विशेष अदालतों का गठन किया गया है।

कड़े कानूनों के तहत होगी मामलों की रोजाना आधार पर सुनवाई

इन विशेष अदालतों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये अदालतें नए और सख्त कानूनों के दायरे में रहते हुए सभी मामलों की दिन-प्रतिदिन यानी रोजाना के आधार पर सुनवाई करेंगी। पारंपरिक अदालती प्रक्रियाओं के चलते पूर्व में इस तरह के कई महत्वपूर्ण मामले वर्षों तक अदालतों में लंबित पड़े रहते थे, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते थे और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता था। अब इन विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के सक्रिय हो जाने से मुकदमों के वर्षों तक लटके रहने की पुरानी और जटिल समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी, जिससे न्याय व्यवस्था में आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

युवाओं के भविष्य की सुरक्षा

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय का यह साझा प्रयास एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और पेपर लीक जैसी दीमक रूपी समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए इस प्रकार की कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था का होना अत्यंत अनिवार्य माना जा रहा है। इन अदालतों के गठन से न केवल अपराधियों में कड़ा भय पैदा होगा, बल्कि परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा, जिससे प्रदेश के युवाओं को समय पर निष्पक्ष न्याय मिल सके।

Read More  :  IND vs ZIM 2nd T20 : हरारे की पिच आज किसका साथ देगी, बल्लेबाज चमकेंगे या गेंदबाज छाएंगे