Mouni Roy Suraj Nambiar Divorce: टीवी और फिल्म अभिनेत्री मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार ने शादी के लगभग चार साल बाद आधिकारिक तौर पर अलग होने की घोषणा कर दी है। इस खबर के बाद चर्चा का विषय यह बन गया है कि तलाक के बाद मौनी रॉय को कितनी एलीमनी मिल सकती है। हालांकि दोनों ने सार्वजनिक रूप से किसी वित्तीय समझौते का ब्योरा साझा नहीं किया है, लेकिन भारतीय कानून में एलीमनी तय करने के नियम स्पष्ट हैं।
Haryana News: 20,629 बीएलओ नियुक्त, 15 जून से आपके घर दस्तक देगी चुनाव आयोग की टीम
भारतीय कानून में एलीमनी का आधार
भारतीय कानून में ऐसा कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं है जो तलाक के मामलों में एलीमनी को स्वतः तय कर दे। अदालतें आमतौर पर हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों पर भरोसा करती हैं। अंतिम निर्णय लेने से पहले अदालत कई कारकों का मूल्यांकन करती है, जैसे आय, संपत्ति, शादी की अवधि और जीवन स्तर।
मासिक एलीमनी की व्यवस्था
कई मामलों में अदालतें पति की शुद्ध मासिक आय का लगभग 25% एलीमनी के रूप में तय करती हैं। इसका उद्देश्य पत्नी को शादी के दौरान मिले जीवन स्तर जैसा ही जीवन स्तर बनाए रखने में मदद करना होता है। वास्तविक रकम आय, वित्तीय दायित्व और परिस्थितियों के आधार पर बदल सकती है।
एकमुश्त एलीमनी
यदि दोनों पक्ष एकमुश्त भुगतान पर सहमत होते हैं, तो अदालत पति की कुल नेट वर्थ का 20% से 33% तक एलीमनी तय कर सकती है। इसमें संपत्ति, निवेश और जमीन-जायदाद शामिल होती है।
अदालत की जांच पड़ताल
एलीमनी तय करते समय अदालत कई पहलुओं पर विचार करती है, लंबी शादियों में एलीमनी अधिक होती है। शादी के दौरान अपनाए गए जीवन स्तर को ध्यान में रखा जाता है। यदि किसी साथी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए करियर में त्याग किया है, तो उसे एलीमनी का अधिकार मिलता है। भले ही पत्नी नौकरी करती हो, लेकिन यदि उसकी आय पति से कम है तो वह एलीमनी की हकदार हो सकती है।
कब बंद हो सकती है एलीमनी?
भारतीय कानून में कुछ स्थितियां ऐसी हैं जहां एलीमनी बंद हो सकती है, यदि एलीमनी पाने वाला साथी दोबारा शादी कर लेता है। यदि दोनों साथी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों और उनकी आय लगभग बराबर हो। बच्चों के पालन-पोषण का खर्च एलीमनी से अलग तय किया जाता है और यह बच्चों की कस्टडी पर निर्भर करता है।








