मां, मेरी दौड़ देखी? गुरिंदर वीर ने 100 मीटर में बनाया नया इतिहास

जालंधर  जालंधर के गांव पतिआल के युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने भारतीय खेल जगत में नया इतिहास रच दिया है। रांची में 23 मई को आयोजित 29वें राष्ट्रीय वरिष्ठ प्रतियोगिता कप में गुरिंदर ने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है।  गुरिंदर की जीत के बाद पूरे जालंधर में खुशी का माहौल है। अंतिम दौड़ खत्म होते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। करीब 90 वर्षीय दादी चरण कौर ने

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Published On :

मई 25, 2026

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जालंधर 

जालंधर के गांव पतिआल के युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने भारतीय खेल जगत में नया इतिहास रच दिया है। रांची में 23 मई को आयोजित 29वें राष्ट्रीय वरिष्ठ प्रतियोगिता कप में गुरिंदर ने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। 

गुरिंदर की जीत के बाद पूरे जालंधर में खुशी का माहौल है। अंतिम दौड़ खत्म होते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। करीब 90 वर्षीय दादी चरण कौर ने पोते को लड्डू खिलाकर आशीर्वाद दिया जबकि पिता कमलजीत सिंह की आंखें खुशी से नम हो गईं।

दौड़ खत्म होने के तुरंत बाद गुरिंदर ने सबसे पहला फोन अपनी मां गुरविंदर कौर को किया और पूछा मम्मी देखी मेरी दौड़? मां ने जवाब दिया हां बेटा, तूने कमाल कर दिया। बाद में पिता से बात करते हुए गुरिंदर ने मुस्कुराकर कहा डेडी दस्स फेर किदां? बेटे की यह बात सुन परिवार की खुशी और बढ़ गई।

पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं पिता
गुरिंदर के पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस से सहायक उप निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं और वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि गुरिंदर बचपन से ही गांव की गलियों, खेतों और पगडंडियों में दौड़ता रहता था। 12 साल की उम्र में उसने गंभीरता से अभ्यास शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

रोज आठ घंटे अभ्यास करते हैं गुरिंदर
पिता के अनुसार गुरिंदर रोज करीब आठ घंटे अभ्यास करता था। कई बार परिवार से बात करने तक का समय नहीं होता था। अंतिम दौड़ से पहले उसने अपने सीने पर लगे क्रमांक के पीछे 10.10 सेकंड का लक्ष्य लिख रखा था। कीर्तिमान बनाने के बाद उसने उसी क्रमांक की ओर इशारा कर जश्न मनाया।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी गुरिंदर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंजाब के इस गबरू ने देश और दुनिया में राज्य का नाम रोशन किया है।

गुरिंदर के प्रशिक्षक सर्बजीत सिंह ने कहा कि 10.09 सेकंड का समय भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि गुरिंदर ने राष्ट्रमंडल खेलों का अर्हता समय भी पार कर लिया है। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना है। महान धावक मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ड को अपना आदर्श मानने वाले गुरिंदर वीर आज पंजाब और देश के युवाओं के लिए नई प्रेरणा बन गए हैं।

 

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