Mojtaba Khamenei Health : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के बीच ईरान से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बड़े खुलासे हुए हैं। खुफिया रिपोर्ट्स और न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर के परिसर पर हुए भीषण हमले में मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बताया जा रहा है कि उनके चेहरे और शरीर पर गहरे जख्म हैं। अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने यहाँ तक दावा किया है कि इस घातक हमले में मोजतबा ने अपना एक पैर खो दिया है। यह वही हमला था, जिसमें उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई और परिवार के कई अन्य सदस्य मारे गए थे।
तस्वीरों से दूरी और पर्दे के पीछे से शासन: क्या है सच्चाई?
8 मार्च को सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से अब तक मोजतबा खामेनेई की कोई भी ताजा तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह सस्पेंस उनकी सेहत को लेकर उठ रहे सवालों को और गहरा कर देता है। हालांकि, ईरानी सूत्रों का कहना है कि शारीरिक रूप से गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद मोजतबा मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं। वे सार्वजनिक रूप से सामने आने के बजाय ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और कैबिनेट मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कर रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में ईरान की सत्ता के गलियारों में ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की पकड़ सबसे मजबूत मानी जा रही है, जो मोजतबा के साथ मिलकर रणनीतिक फैसले ले रही है।
इस्लामाबाद में शांति वार्ता: अमेरिकी उपराष्ट्रपति और ईरानी दल के बीच मंथन
एक तरफ मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अटकलें तेज हैं, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद कूटनीति का केंद्र बनी हुई है। यहाँ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय दल ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ युद्धविराम (सीजफायर) की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है। ईरानी पक्ष ने अपनी टीम को प्रतीकात्मक रूप से ‘#Minab168’ नाम दिया है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी समझौता तब तक संभव नहीं है जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह बंद नहीं करता और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को वैश्विक व्यापार के लिए खुला रखने की गारंटी नहीं देता।
भारत का मानवीय मिशन: 312 मछुआरों की सुरक्षित घर वापसी
क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा करते हुए बताया कि ईरान में फंसे 312 भारतीय मछुआरों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। इस जटिल ऑपरेशन को आर्मेनियाई सरकार के विशेष सहयोग से अंजाम दिया गया। विदेश मंत्रालय की सक्रियता के चलते सभी मछुआरे सुरक्षित रूप से भारतीय सरजमीं पर लौट आए हैं। यह मिशन ऐसे समय में पूरा हुआ जब ईरान में पिछले 1,000 घंटों से अधिक समय से इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा हुआ है और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
युद्ध का मैदान और भविष्य की राह: लेबनान में बढ़ता मौतों का आंकड़ा
शांति वार्ता के प्रयासों के समांतर जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक बनी हुई है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं, जिससे वहां मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 357 हो गई है। हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी इस जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की शारीरिक अक्षमता और ईरान के भीतर जारी आंतरिक विद्रोह के बीच, आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या एक महायुद्ध की चपेट में आएगा।
Read More : SRH vs PBKS : अभिषेक शर्मा का तूफानी अर्धशतक, हैदराबाद ने पावरप्ले में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड










